अनामिका घटक की कविता

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इस पार प्रिये तुम हो

मुझे नहीं जाना
उस पार
क्योंकि इस पार …
मैं  हूँ तुम्हारी संगिनी
उस पार निस्संग जीवन है
स्वागत के लिए
इस पार मैं सहधर्मिणी
मातृत्व सुख से परिपूर्ण
देवता स्वरुप माता – पिता
पूजने के लिए
उस पार मैं स्वाधीन हूँ
परंतु स्वाधीनता का
रसास्वादन है एकाकी
गरल सामान
इस पार रिश्तों की पराधीनता
मुझे है सहर्ष स्वीकार
इस पार प्रिये तुम हो…………

अनामिका घटक

नॉएडा

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3 टिप्पणियाँ "अनामिका घटक की कविता"

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