शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ की रचना – तिरंगा लिख

तिरंगा लिख
न अच्छा न गंदा लिख
कोई कहानी जिंदा लिख|

 
किस दल को कब कहां दिया
काले धन का चंदा लिख|

 
काले चेहरे नहीं छुपा
सबका गोरख धंधा लिख|


पकड़े गये गुनाहों को
लिख फाँसी का फंदा लिख|

 
अंतस में घुमड़ें बादल
तो कोई बात चुनंदा लिख|

 
राज मुकुट पर बहुत लिखा
अब तो कीट पतंगा लिख|

 
चेहरे ढके मूखोटों से
उनको खुलकर नंगा लिख|

 
अवसरवादी कलमों ने
जो झूठा लिखा पुलंदा लिख|

 
खड़ी द्रोपदी विलख रही
दुर्यॊधन की जंघा लिख|

 
लगी हुई है आग वहां
मत कागज पर दंगा लिख|

 
लाख रहें कौमी झंडे
तू बस एक तिरंगा लिख|

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प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌

2 blogger-facebook:

  1. लाख रहें क़ौमी झंडे ,तू बस एक तिरंगा लिख।
    बहुत सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं

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