नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ खोज कर पढ़ें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

दिलीप कठेरिया की कुछ कविताएँ

साझा करें:

अनुक्रम १. शिल्प २. अपने हिस्से की ताकत ३. नीली रोशनी ४. मिट्टी के ज़र्रे ५. ऐशट्रे ६. बलात्कार ७. डाली ८. विकास का मुंह टेढ़ा है ...

dilip katheria

अनुक्रम

१. शिल्प

२. अपने हिस्से की ताकत

३. नीली रोशनी

४. मिट्टी के ज़र्रे

५. ऐशट्रे

६. बलात्कार

७. डाली

८. विकास का मुंह टेढ़ा है

९. इश्क का घोषणा-पत्र

१०. अधूरे सपने

११. संघर्ष के दस्तावेज़

१२. गुब्बारे

परिचय

दिलीप कठेरिया

जन्म

०४ मई १९७०, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश

रचनात्मकता

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित

संप्रति

एसोशिएट फैलो

भारतीय दलित अध्ययन संस्थान (ऌऌईद)

नई दिल्ली

संपर्क

एल-२३९, फेज- ३

नांगलोई, नई दिल्ली- ४१

ईमेल – dalip_katheria@yahoo.co.in

 शिल्प

साहित्य के सामंतों को

हमारे साहित्य में

भोगे गए जख़्मों की पीड़ा नहीं

शिल्प कि बुनावट अख़रती है

इनके सरोकारों की धरती पर

पीड़ा के नहीं

शिल्प के पौधे पलते हैं

शिल्प

किसी ख़ूबसूरत लड़की की तरह

इनकी शिराओं में बहते ख़ून को

गर्म करता है

लेकिन हमारे सरोकारों की धरती पर

शिल्प के नहीं

पीड़ा के पोधें पलते है

पीड़ा हमारी ज़िन्दगी को

संघर्ष के लिए संगठित करती है

पीड़ा बयान करने के लिए

हमें

शिल्प की सुन्दर बगिया की नहीं

सिर्फ

एक अदद कलम की ज़रूरत है ।

***

 अपने हिस्से की ताकत

कुछ हाथ उठे हैं

वक्त के चेहरे से उतारने नकाब

इन हाथों के सृजन में

ऐसा जहां था

जिसमें ज़िन्दगी थोड़ी ख़ूबसूरत हो

जिसमे बचपना

बचपने की उम्र से

पहले ही न गुजर जाए

जिसमे संजोए गए ख्वाब और ख्वाहिशें

अंजाम तक पहुंचने से पहले ही

दम ना तोड़ दें

लेकिन, इन हाथों में बचा है

दर्द सिर्फ दर्द और दर्द

ये कमजोर हाथ

अगर मुठ्ठी हो जाए

तो बदल दे सियासत की तस्वीर

और, हिला दें लोहे के महलों को भी

इन हाथों की सच्चाई में

आओ मिला दे

अपने हिस्से कि ताकत

ताकि ये हाथ

संघर्ष के बुढ़ाने से पहले

इस लड़ाई का रुख़ बदल दे

और कैद कर ले

नकाब के पीछे की दास्तान ।

***

 नीली रोशनी

मेरे वक्त के एकलव्य

किसी द्रोणाचार्य के षड्यंत्र में फंसकर

अपना अंगूठा नहीं देंगे

क्योंकि उन्हें

अर्जुन के गांडीव से निकले

तीरों को तोड़ फेंकना है ।

मेरे वक्त के शम्बूक

किसी राम द्वारा

वध नहीं किए जा सकेंगे

क्योंकि उन्हें

तिरस्कृत होकर

धर्म में बने रहना

अब मंजूर नहीं है ।

मेरे वक्त के वाल्मीकि

अब रामायण नहीं लिखेंगे

क्योंकि उन्हें

दलितों के शोषण और विद्रोह का

पथरीला इतिहास लिखना है ।

मेरे वक्त की संतो ताई

अब मैला नहीं उठाएगी

क्योंकि उसने

मनु का सिर फोड़ने के लिए

हथौड़ा उठा लिया है ।

मेरे वक्त की बेटियां

उम्र से पहले ब्याही नहीं जायेंगी

क्योंकि उन्होंने अब

जिन्दगी के पन्नों पर

लिखना सीख लिया है ।

मेरे वक्त की संस्कृति

अब किसी हवेली में

रखैल नहीं होगी

क्योंकि उसने

ज़मींदार को कत्ल कर दिया है ।

मेरे वक्त का भविष्य

हम ही लिखेंगे

क्योंकि

भविष्य लिखने वाली कलम

अब हमारे हाथों में है ।

मेरे दोस्तों !

मेरे वक्त में

इतना सब कुछ हो रहा है

तो क्या में

इस सर्दी से ठिठुरती रातों में बैठकर

किसी आग का

इंतज़ार करता रहूं ?

या फिर निकल भागूं

दूर से आती किसी

नीली रोशनी की ओर ?

***

 मिट्टी के ज़र्रे

हम मिट्टी के ज़र्रे है

एक दिन चमन पर छाएंगें

वर्ण-व्यवस्था की बेड़ी को

अपने पैरों से ठुकराएंगे

धर्माचार्यों के षड्यंत्र से

दलितों को मुक्त कराएंगे

शिक्षा की सीढ़ी पर चढ़कर

इतिहास खंगालने जाएंगें

जो दफ़न है नायक अपने

उनको न्याय दिलवाएंगे

वेदों में लिखा सब झूठा है

मेरे लोग अब जान जाएंगें

अंबेडकर, फुले, कबीर को पढ़कर

ज्ञान की नई परम्परा बनाएंगे

देर नहीं, अब उगते हुए सूरज को

हम मुठ्ठी में थाम लाएंगे

हम थोडें नहीं बहुत ज्यादा है

एक दिन इकट्ठा हो जाएंगे

हम मिट्टी के ज़र्रें है

एक दिन चमन पर छाएंगे..

***

 ऐशट्रे

वर्ण-व्यवस्था रूपी ऐशट्रे

जो बुझी हुई

सिगरेट और राख़ से भरी

मेरे सामने रखी है

और इसमें

दलित समाज रूपी

माचिस की उजली तीलियां

बचने की

लाख़ कोशिशों के बावजूद

धीरे-धीरे

काली पड़ती जा रही है

क्योंकि

राख़ में रहते हुए

काले होने से बचना

घुप्प अंधेरे में

कुछ देख़ लेने जैसा है

लेकिन अब

धीरे-धीरे

माचिस की तीलियां

ख़तरे को भांपते हुए

महसूस करने लगी है कि

उजले बने रहने के लिए

वर्ण-व्यवस्था रूपी

ऐशट्रे को तोड़ना

कितना ज़रूरी हो गया है ।

***

 बलात्कार

सुना है

भगवान वास करते है

हर इंसा के दिल में

और

भगवान द्वारा रचित है

यह समस्त संसार

तो पूछता हूं मैं

इस दूषित समाज में

जब कोई हैवान

किसी बच्ची की अस्मिता को

करता है तार-तार

तो क्यों नहीं बाहर आता

भगवान दिल से ?

जब रोती चिल्लाती बच्ची

पुकारती है मदद

और सो जाती है

सदा के लिए

तो क्या ?

भगवान ही कराते है बलात्कार ?

***

 डाली

ऐ डाली

तुम कांटों से शुरु होती हो

और

फूल पर खत्म होती हो

लेकिन

फूल में आते ही खुशबू

लोग तुम्हें

फूल से रिक्त कर देते है

ऐ डाली

कब ऐसे लोग होंगे

जो

फूल को खिलने देंगे

और

कांटों को सज़ा देंगे ।

***

 विकास का मुंह टेड़ा है

शिमला के पहाड़ों

और हसीन वादियों के बीच

बहते झरने

सुन्दर तो लगते है

लेकिन

दलितों के श्रम से

बहा पसीना

ज्यादा खूबसूरत है ।

माशूक की गोद के

सिरहाने में रोमानी खयाल

दिलकशं तो है

पर इससे बड़ी हकीकत

बेटी पैदा होने पर

गमज़दा हो जाना है ।

दिल्ली की आलीशान इमारतें

विकास की ऊंचाई छूती दिखती है

पर इन्हें बनाने वालें

मजदूरों के घरों की नीची छतें

बरसात में आज भी टपकती है ।

ऐश्वर्या की शादी की खबर

पूरी दुनियां जानती है

लेकिन उसी देश में

बहुत सी लड़कियां

बिना दहेज के

अभी तक कुंवारी बैठी हैं ।

भारत के कॉल सेन्टर

अंग्रेजी भाषा

गोरों से भी अच्छी बोलते है

लेकिन

हकीकत ये भी है कि

दलित बस्तियों के अनगिनत बच्चे

अभी तक

चाय की दुकान पर

झूठे कप धोने से

आगे नहीं बढ़े हैं ।

शहर के बड़े ऑडिटोरियम में

हो रहे संगीत के भव्य समारोह

बेहूदा नकल है

दलित बस्तियों में

कामगारों की टोलियों के बीच

जिन्दगी की महक को

जिंदा रखने के लिए

गाए जाने वाले तरानों की ।

लम्बी चमचमाती कारें

सड़कों पर दौड़ना बेईमानी है

उस बुढ़े बाप से

जो अपने नौजवान बेटे की लाश को

पोस्टमार्टम के लिए

गांव से शहर तक

साईकिल पर ढो रहा है ।

***

 इश्क का घोषणा-पत्र

हमें इश्क है

तकलीफों में पाले हुए

उन सपनों से

जो हमें हर सुबह

ज़िन्दगी से

दो-चार होने के लिए

ज़िंदा रखते है ।

हमें इश्क है

हमारे सीनों में बची

उस आग से

जिसकी तपिश

आंदोलन की मशालों को

जलाए रखने में काम आती है ।

हमें इश्क है

अपने काम के औजारों से

जो हमें श्रम का

गर्वीला एहसास कराते हैं ।

हमें इश्क है

स्कूल जाते छोटे बच्चों से

जिनके मस्तिष्क

किसी साजिश में नहीं बल्कि

ज़िन्दगी की नई इबारत

सीखने में व्यस्त है ।

हमें इश्क है

बहती हुई हवा से

जो ऊंच-नीच का

फर्क किए बगैर

हमारी सांसों में आती-जाती है ।

हमें इश्क है

डॉ. अम्बेडकर के आंदोलन की

रोशनी से

जिसने साबित किया कि

प्रतिभाएं वर्ण की मोहताज नहीं होती ।

हमें इश्क है

लड़ते हुए अपने साथियों से

जो अस्पृश्यता

और गैरबराबरी के खिलाफ

चेतना की जमीन

तैयार करने की

रणनीति में जुटे हैं ।

मेरे दोस्तों

हमारे इश्क से अगर

तुमको भी है मोहब्बत

तो आओ चले मिलकर

अपने इश्क के घोषणा पत्र को

खंजर बनाकर

जाति-व्यवस्था के सीने में

अंदर तक गाड़ आए ।

***

 अधूरे सपने

इतिहास की आंखों के सपने

अभी अधूरे है

इन्हें तलाश है

भविष्य के अपने

नायक और हमसफर की

उम्मीदवारी की

इस कतार में अगर

तुम भी हो एक

तो बधाई देता हूं तुम्हें

समाज की

घिनौनी व्यवस्थाओं को

अस्वीकृत कर

विद्रोह की चिंगारी

एक जरूरी कार्यवाही लगती हो

सिर पर मैला उठाना

इंसानियत को दी जाने वाली

सबसे बड़ी गाली लगती हो

तो बधाई देता हूं तुम्हें

हरिजन कहलाने पर

हृदय में टीस उठती हो

मंदिर से आने वाली आवाजें

शोषण का बीज लगती हो

हिन्दू परंपराओं की श्रृंखला

भौंडे पाखंड लगते हो

समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व

जीवन के सच्चे मूल्य लगते हो

तो बधाई देता हूं तुम्हें

राम कायर

शम्बूक निर्भय लगते हो

द्रोण षड्यंत्रकारी

एकलव्य बलिदानी लगते हो

झलकारी बाई वीरांगना

सावित्री बाई माता लगती हो

तो बधाई देता हूं तुम्हें

निर्गुण संत तार्किक

बुद्घ, फुले और अम्बेडकर आदर्श

शिक्षा

आंदोलन का हथियार

आरक्षण

भीख नहीं अधिकार लगते हो

तो बधाई देता हूं तुम्हें

परजीवी होने में शर्म हो

श्रम की गरिमा का एहसास हो

सामाजिक कर्तव्यों का बोध हो

अन्वेषण के राही हो

मानवीय समाज के वाहक हो

दलित चेतना से लैस हो

तो बधाई देता हूं तुम्हें

इतिहास की आंखों को

तुम्हारी ही तलाश है ।

***

 संघर्ष के दस्तावेज़

अपने हकों की धरती से

बेदख़ल किए जाने के खिलाफ

संघर्ष की वैचारिकी

हमारी ज़िंदगी के

महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है

जिन्हें नष्ट करने की

नाकाम हरकतों के पागल कुत्ते

गोहाना, सालवन, झज्जर

और खैरलांजी में

ग़श खाकर गिर चुके हैं

सावधान ऐ तल्ख़ निगाह

इन दस्तावेज़ों पर

बुद्ध, कबीर, रैदास, फुले

और अम्बेडकर के

अमिट हस्ताक्षर है

जो हमारे दिमाग की धमनियों में

रक्त बनकर बह रहे है

और इनके सुन्दर फूल

हमारे हिरावल दस्तों की

किताबों के बीच दबी

कोई मुर्दा निशानी नहीं

बल्कि

पहली मोहब्बत की तरह

आज भी ज़िंदा है ।

***

 गुब्बारे

मैं गुब्बारे बेचता हूं

लाल, हरे, नीले, पीले, संतरी

हां, मैं बदरंग जिंदगी में

रंग भर देने वाले

गुब्बारें बेचता हूं

इन गुब्बारों में भरता हूं

अपनी जिंदगी की

बची हुई कीमती गर्म सांसे

जो मेरे शरीर में अभी बाकी है

बच्चे जब इन गुब्बारों को पाकर

मुस्कुराकर खुश होते हैं

तो मुझे लगता है जैसे

मैं एक फरिश्ता हूं

बुढ़ी दादी कहती थी

फरिश्ते बच्चों को खुशी देते है

बच्चे फिर बच्चे है

वो शैतान नहीं होते

गुब्बारों में कैद मेरी सांसों को

आजादी देकर वो

बिखरा देते है खुले आसमान में

मेरी सांसे तैरने लगती है

और मैं एक बार फिर से

जिंदा हो जाता हूं

मेरे लिए तो

बच्चे ही फरिश्ते हैं

हां, मैं गुब्बारे बेचता हूं

लाल, हरे, नीले, पीले, संतरी

मैं गुब्बारे बेचता हूं ...

***

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
  1. अच्छी भा्वपूर्ण सारी कवितायें, बधाई। मेरा अनुभव ये कहता है कि एक बार में एक या अधिकतम दो कवितायें ही पोस्ट करनी चाहिये तब जाकर कमेन्ट करने वालों को सहूलियत होती है कि कविता के मटेरियल पर कुछ कह सकें अन्यथा अगर कुछ कमेन्ट भी हासिल होगा तो चलताऊ क़िस्म का होगा सिर्फ़ रस्म अदायगी के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$height=75

---प्रायोजक---

---***---

|कथा-कहानी_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$rm=1$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|उपन्यास_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

|लोककथा_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$height=85

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=complex$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$height=85

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3982,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2956,कहानी,2219,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,521,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,339,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,62,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,10,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,26,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1203,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1993,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,698,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,775,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: दिलीप कठेरिया की कुछ कविताएँ
दिलीप कठेरिया की कुछ कविताएँ
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TLxDzwrj7yI/AAAAAAAAJLA/MC4Fwpgqi9k/dilip%20katheria%5B2%5D.jpg?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TLxDzwrj7yI/AAAAAAAAJLA/MC4Fwpgqi9k/s72-c/dilip%20katheria%5B2%5D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2010/10/blog-post_979.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2010/10/blog-post_979.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ