मंगलवार, 30 नवंबर 2010

अवनीश सिंह चौहान की कविता – अब तो जागो

अब तो जागो! कौन देख रहा है हमारे बहते आंसू लहूलुहान मन और तन जिस पर करते आये हैं प्रहार जाने कितने लोग सदियाँ गुजर गयीं पीड़ाएँ भोगती रहीं ...

सोमवार, 29 नवंबर 2010

शशांक मिश्र ‘‘भारती'' की गजलें

एकः- विश्‍वास रूपी दीपक जो जलाते रहें, मंजिल की समीपता आप पाते रहें।   गीत विश्‍वासों के निःस्‍वर होते नहीं, सुबह के प्रिय दृश्‍य आप गाते ...

राजीव श्रीवास्तवा की कविताएँ - नतीजा आया और खुद को वो एच .आई .वी पॉज़िटिव पाया!

बाल विवाह - एक बेईमानी गुड़ियों के संग खेलती, चिड़िया सी चहक रही, माँ -बापू की लाड़ली, फूलों सी महक रही! छोटे-छोटे हाथों से, मिट्टी का...

मालिनी गौतम की कविताएँ - मेरे बच्चे, होस्टेल में तुम्हारा सामान जमाते समय मैं कुछ छोड़कर आई हूँ तुम्हारे लिये…

परवरिश सबेरे की हल्की बारिश में नहाई हुई सुबह के माथे पर अब चमकने लगी है सोनेरी सूरज की बिदिंया अलसाये से शरीर को लिये मैं बैठी हूँ ब...

रविवार, 28 नवंबर 2010

राजीव श्रीवास्तवा की कविताएँ

एक फ़ौजी की कहानी आया बुलावा धरती माँ का , जब दुश्मन ने ललकारा, चल दिया वीर सब को छोड़ , जब माँ ने उसे पुकारा!   सारे रिश्ते छोटे पड़ जाते...

संजय दानी की ग़ज़ल – मेरे क़ातिल का मुझे कोई पता दो या उसे मेरी तरफ़ से दुआ दो

सज़ा दो मेरे क़ातिल का मुझे कोई पता दो, या उसे मेरी तरफ़ से दुआ दो। मैं चराग़ों की हिफ़ाज़त कर रहा हूं, बात ये सरकश हवाओं को बता दो। बेवफ़ा कह क...

राजीव श्रीवास्तवा के चंद मुस्कुराते शेर

चंद मुस्कुराते- शेर ! बेदर्द जमाने में कोई अपने मिल जाते हैं , ढूँदने से राख में अँगारे निकल आते हैं !   प्यार में पल-दो पल में इकरार नही ह...

एकता नाहर की कविता - नारी तुम श्रृंगार करो, तन का नहीं मन का

नारी तुम श्रृंगार करो, तन का नहीं मन का सादगी स्वच्छता सत्य शील, लक्ष्य बनाओ जीवन का   हाथों में कंगन नहीं, दान को सुशोभित करो आँखों में...

दीनदयाल शर्मा की कविता - समर्पण

समर्पण माँ बहिन बीवी बेटी और न जाने कितने रूपों में तू समर्पित है तेरा जीवन सबके लिए अर्पित है ममता उड़ेलती प्यार बांटती तू अंतत: बंट जाती ...

शनिवार, 27 नवंबर 2010

विजय वर्मा की हास्य कविता – कवि का चक्कर

  एक बार यमदूत एक कवि के चक्कर में पड़ गया गया था उसकी जान लेने पर अपनी देने पर उतर गया.   कवि के पास जाकर बोला-- अपनी आखरी कविता पढ़ जाओ, ...

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

प्रमोद भार्गव का आलेख - बिहार : विकास की भूख जगाने का परिणाम

  बिहार में आए ऐतिहासिक जनादेश ने साबित कर दिया है कि अर्से तक हिंसा, अराजकता और परिवारवाद की अजगरी गुंजलक में जकड़ा बिहार अब करबट ले रहा ह...

बुधवार, 24 नवंबर 2010

चर्चित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका ‘सरस्वती सुमन’ के लिए रचनाएँ आमंत्रित

देश की चर्चित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक त्रैमासिक पत्रिका  ‘सरस्वती सुमन’  का आगामी अंक  ‘मुक्‍तक विशेषांक’  होगा जिसके अतिथि संपादक  होंगे स...

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

शुभ शिखर मिश्र की कविता - -

ऐसा ही कुछ-कुछ होता है कुछ समय गुजरता है खुश-खुश कुछ समय मुझे भरमाता है, छोटे से बालक मुझ शुभ को तकदीर पे गुस्सा आता है।   मैं नहीं खेलता ...

रामदीन की कविता–अर्ध सत्य

अर्ध सत्‍य '' ‘ प्रजापति ' दीवाली की धुरी आप हो आप ही सिरजनहार पारस जैसा पावन करते महिमा अपरम्‍पार।   पड़ी अपावन अनगढ़ मिट्‌ट...

विजय वर्मा की ग़ज़लें

ग़ज़ल [काश्मीरी-भाइयों के नाम] बीते हुए दिन हम पर आज भी भारी है गल्तियाँ कुछ तुम्हारी कुछ हमारी है.   संवाद के सारे रास्ते खोल के रखना यही...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बाल-गीत

कभी न खाना तंबाकू किसी किराने की दुकान से तंबाकू के पाउच ले आते, गली गली में बच्चे दिखते खुल्ल्म खुल्ला गुटखा खाते।   बाली उमर और ये ग...

संजय दानी की ग़ज़लें

।वंश का हल खींचते हैं। शौक के बादल घने हैं दिल के ज़र्रे अनमने हैं। दीन का तालाब उथला ज़ुल्म के दरिया चढ़े हैं। अब मुहब्बत की गली में घर,ह...

एस के पाण्डेय की लघुकथा – प्रमाणपत्र

*प्रमाणपत्र* एक बुढ्ढा बैंक में क्लर्क से जोर-जोर कह रहा था कि मैं जिन्दा तुम्हारे सामने खड़ा हूँ। इससे बड़ा मेरे जीवित होने का दूसरा और क्...

सोमवार, 22 नवंबर 2010

सत्यवान वर्मा सौरभ के दोहे

              दोहे - 1 हिन्दी माँ का रूप है, समता की पहचान।    हिन्दी ने पैदा किए, तुलसी औ’ रसखान।। 2 हिन्दी हो हर बोल में, हिन्दी पे हो ...

शनिवार, 20 नवंबर 2010

रजनीकांत के चुटकुले

रोबोट जब रिलीज हुई थी तो रजनीकांत चुटकुलों की चहुँओर फिर से भरमार हो गई थी. कुछ चुनिंदा रजनीकांत चुटकुलों का आनंद फिर से लें. रजनीकांत प्य...

प्रमोद भार्गव की कहानी – परखनली का आदमी

सुनो...! सुनाएं एक कहानी.....। परखनली के आदमी की कहानी.....। यह कहानी और कहानियों की तरह परीलोक की कथा नहीं है, न ही भूतकाल की कहानी है, न ...

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

सत्यवान वर्मा सौरभ की कविताएँ - बिखेर चली तुम साज मेरा अब कैसे गीत गाऊं मैं

  1सबके पास उजाले हों - मानवता का संदेश फैलाते, मस्जिद और शिवाले हों। नीर प्रेम का भरा हो सब में, ऐसे सब के प्याले हों।।   होली जैसे रंग ...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव के बालगीत

  करूणा दया प्रेम का भारत ‌   भारत माँ का शीश हिमालय‌ चरण हैं हिंद महासागर, मातुश्री के हृदय देश में बहती गंगा हर हर हर|   अगल बगल म...

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

दीप्ति परमार का आलेख : मोहन राकेश की जिन्दगी का सच्चा दस्तावेज - एक और जिन्दगी

'एक और जिन्दगी' मोहन राकेश की श्रेष्ठ एवं चर्चित कहानी है । पति पत्नी के दाम्पत्य सम्बन्घों पर प्रकाश डालने वाली यह कहानी मोहन राक...

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

यशवन्त कोठारी का आलेख - आधुनिक भारत के निर्माता

साठ वर्षों से अधिक के आजाद भारत की जो तस्‍वीर उभर कर सामने आती है उसे देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि आधुनिक भारत के निर्माण में सबसे ज्‍यादा...

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