गुरुवार, 4 नवंबर 2010

डॉ0 भावना कुँअर और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की दीपावली हाइकु जुगलबन्दी

 

दीपावली (हाइकु -जुगलबन्दी)

DeepParva

1.

दीप जलाओ

जो भटके पथ में

राह दिखाओ ।

 

2.

टूटे हैं दीए

मैं भटकों को कैसे

राह दिखाऊँ ?

 

3.

कब था डरा ?

नन्हा-सा दीप यह

नेह से भरा ।

 

4.

फैला बारूद

नन्हीं-नन्हीं साँसों में

तब से डरा ।

 

5.

रौशन घर

बन गया मन्दिर

पूजा के स्वर ।

 

6.

उजड़े घर

मन्दिर से भी आते

चीखों के स्वर ।

 

7.

फुलझड़ियाँ

घर रौशन करें

कोई न डरे ।

 

8.

छिपाए न हों

फुलछड़ी में बम

देख लो जरा ।

 

9.

फैला अँधेरा

मायूसियों से भरा

सबका मन ।

 

10.

अँधेरे हटा

उगाएँगे सूरज

हर आँगन ।

 

11.

दीपक जला

रौशन हर दिशा

अँधेरा टला ।

 

12.

दीपक नहीं

छिटकी धरा पर

शिशु की हँसी ।

13.

आँधियाँ चलीं

बुझने लगे दिए

वीरान गली ।

 

14.

आँधियों का क्या

बुझाएँगी वे दीप ,

हमें जलाना ।

 

15.

भटका राही

हर ओर दिखती

अँधेरी खाई।

 

16.

अजाना पथ

बढ़े चलो दीप ले

अपना रथ ।

 

17-

चाँद बेचारा

देख दीपशिखाएँ

मुँह छुपाए ।

 

18-

नदिया भरे

धरा से नभ तक

उजाला बहे ।

-0-

4 blogger-facebook:

  1. दीपावली से जुड़ी ये हाइकु - जुगलबंदी बहुत सुन्दर है। पर इसमें यह पता नहीं चलता कि कौन सा हाइकु डॉ.भावना कुँअर का है और कौन सा भाई हिमांशु जी का। लेकिन कुछ भी हो, उत्तम हाइकु हैं, दिल को स्पर्श करने वाले।

    उत्तर देंहटाएं
  2. rachana6:44 pm

    wah wah wah
    kitna sunder ye to naya hi prayog hai aur bahut hi safal hai .naya andaj aanand aaya ,
    aap dono ko deepawali ki bahut bahut shubhkamnaye
    saader
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  3. रवि जी "डॉ0" में संक्षिप्ति हेतु शून्य (0) नहीं लाघव चिह्न (॰) का प्रयोग करें (डॉ॰)। इसे विण्डोज़ के Devanagari-INSCRIPT कीबोर्ड में SHIFT+,(comma) से प्राप्त किया जा सकता है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. हाइकू अकसर मुझे प्रभावित नहीं कर पाते, पर आपके हाइको अन्य लोगों से भिन्न लगे। इन्होंने प्रभावित किया। शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं

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