बुधवार, 3 नवंबर 2010

दीनदयाल शर्मा की बाल कविता - गजब की दिवाली

धूम धड़ाका

बजे पटाखा
भड़ाम से बोला
बम फटा था ।

  सर्र-सर्र से
  चक्करी चलती
  फर्र-फर्र
  फुलझड़ी फर्राटा ।

सूँ-सूँ करके
साँप जो निकला
ऐसे लगा, मानो
जादू चला था ।

  फटाक-फटाक
  चली जो गोली
  ऐसा भी
  पिस्तौल बना था ।

ऐसी ग़ज़ब की
हुई दिवाली
किलकारी का
शोर मचा था ।

  हुर्रे-हुर्रे, का
  शोर मचाकर
  बच्चों का टोला
  झूम रहा था ।

जगमग हो गई
दुनिया सारी
ख़ुशियों का पहिया
घूम रहा था ।

--
- दीनदयाल शर्मा
अध्यक्ष , राजस्थान साहित्य परिषद,
हनुमानगढ़ जं. - 335512  .

3 blogger-facebook:

  1. Res.Ravi ji, Namskar..apne kavita prakashit ki, iske liye apka hridey se abhaar..Happy diwali to All...

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी कविता, इस्मे कुछ बिम्ब या मैसेज डाला जाये तो ये और बेहतर हो सकती है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी10:13 pm

    कितना सुलझा हुआ था बचपन

    उत्तर देंहटाएं

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