दीनदयाल शर्मा की बाल कविता - गजब की दिवाली

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धूम धड़ाका

बजे पटाखा
भड़ाम से बोला
बम फटा था ।

  सर्र-सर्र से
  चक्करी चलती
  फर्र-फर्र
  फुलझड़ी फर्राटा ।

सूँ-सूँ करके
साँप जो निकला
ऐसे लगा, मानो
जादू चला था ।

  फटाक-फटाक
  चली जो गोली
  ऐसा भी
  पिस्तौल बना था ।

ऐसी ग़ज़ब की
हुई दिवाली
किलकारी का
शोर मचा था ।

  हुर्रे-हुर्रे, का
  शोर मचाकर
  बच्चों का टोला
  झूम रहा था ।

जगमग हो गई
दुनिया सारी
ख़ुशियों का पहिया
घूम रहा था ।

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- दीनदयाल शर्मा
अध्यक्ष , राजस्थान साहित्य परिषद,
हनुमानगढ़ जं. - 335512  .

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3 टिप्पणियाँ "दीनदयाल शर्मा की बाल कविता - गजब की दिवाली"

  1. Res.Ravi ji, Namskar..apne kavita prakashit ki, iske liye apka hridey se abhaar..Happy diwali to All...

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  2. अच्छी कविता, इस्मे कुछ बिम्ब या मैसेज डाला जाये तो ये और बेहतर हो सकती है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी10:13 pm

    कितना सुलझा हुआ था बचपन

    उत्तर देंहटाएं

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