शशांक मिश्र ‘भारती’ के बाल-गीत

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1-

हम हैं इसके भाग्‍य विधाता

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नन्‍हें-मुन्‍हें और सीधे-सादे

इस देश के प्‍यारे बच्‍चे हैं,

करेंगें डटकर कठोर श्रम

हम कर्म वचन के सच्‍चे हैं,

मेहनत हमारी रंग लाएगी

यह बदल जाएगा देश,

चारों ओर खुशहाली होगी

महक उठेगा परिवेश,

धरा-गगन न दूषित होगा

न कोई बैठेगा खाली,

हम हैं इसके भाग्‍य विधाता

लाएंगे अनुपम लाली,

पौधों का रोपण कर-कर

धरा पर हरियाली लाएंगे,

शुद्ध पर्यावरण लक्ष्‍य होगा

भाई सब वृक्ष बनायेंगे,

राष्‍ट्र और राष्‍ट्रभाषा हित

तन-मन से काम करेंगे,

चिड़िया चहके सोने की

ऐसा समर्पण नाम करेंगे॥

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2-

छुट्‌टी कराती यही घड़ी

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सामने सुन्‍दर दीवार घड़ी

टिक-टिक करती रहती है

चले जहां-वहीं आ जाये

गोल है धरा यह कहती है,

सुबह से शाम तक चलती

न देर रात तक थकती है

कर्मवीर कभी न रुकते हैं

श्रम गाथा यह कहती है,

खड़े-पड़े यह समय बताये

कभी न रुककर सुस्‍ताये,

रहे मेज पर या दीवार पर

जल्‍दी उठो ही कहती जाये,

तीन सिपाही इसके अन्‍दर

सदा ही चलते रहते हैं,

कोई-कोई सीटी हैं बजाते

तब कहीं अलार्म कहते हैं।

स्‍कूल का समय ये बताती

इण्‍टरवल की मौज कराती

टन-टन-टन कर-करके

घड़ी है छुट्‌टी करवाती॥

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3-

भालू आया

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भालू आया, भालू आया

देखो बच्‍चों भालू आया,

गठरी लाद के पीठ पर

नाच दिखाने भालू आया

छम-छम कर है नाचता

डण्‍डा दिखाने से भागता

रोहित-मोहित का मित्र

शहद देखकर ताकता

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शशांक मिश्र भारती

पिथौरागढ़

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1 टिप्पणी "शशांक मिश्र ‘भारती’ के बाल-गीत"

  1. घड़ी कविता में कुछ और मेहनत की जाये तो बच्चों के पाठ्य पुस्तक में शामिल होने का न्योता मिल जायेगा।

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