प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ की बालदिवस विशेष रचना – शत्रु को मित्र बना लो अरारारारा…

शत्रु को मित्र बनालो

खाने के संग एक टमाटर अरारारारा,
मजा आ गया उसको खाकर अरारारारा।

भोंदू खुश रसगुल्ला पाकर अरारारारा,
तोंदू सोया ओढ़ बिछाकर अरारारारा।

मजा आ गया पिक्चर जाकर अरारारारा
देखा उसने जानी वाकर अरारारारा।

 
लगा भोंकने कुत्ता आकर अरारारारा,
पत्थर मारा एक उठाकर अरारारारा।

 
डरकर भागा पूंछ दबाकर अरारारारा,
फिर गुर्राया वापस आकर अरारारारा।

क्या पायेगा मुझे सताकर अरारारारा,
भोदू बोला यह चिल्लाकर अरारारारा।

 
क्यों पत्थर मारा है कायर अरारारारा,
कुत्ता बोला उसे सुनाकर अरारारारा।

 
एक दूजे को मित्र बनाकर अरारारारा,
मिलकर रहें संग में आकर अरारारारा।

यही नियम मानव अपनाकर अरारारारा,
रहें मित्र को शत्रु बनाकर अरारारारा।

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6 टिप्पणियाँ "प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ की बालदिवस विशेष रचना – शत्रु को मित्र बना लो अरारारारा…"

  1. सुंदर प्रस्तुति अरारारा......:)

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  2. kya khoob likha hai aap ne arara
    maja aa gaya paad kar arara

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  3. एक दूजे को मित्र बनाकर अरारारारा,
    मिलकर रहें संग में आकर अरारारारा।

    यही नियम मानव अपनाकर अरारारारा,
    रहें मित्र को शत्रु बनाकर अरारारारा।
    ..sudar baal rachna..
    ....baal diwas kee haardik shubhkamnayne..

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  4. अच्छी कविता एक नये फ़्लेवर लिये हुए,बातों में कुछ और बिम्ब होते तथा और कुछ गहराई आ जाये तो ये कविता मंच को लूटने का माद्दा रखती है।

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  5. दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    कल 14/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. बेहतरीन कविता अरारारारा,

    उत्तर देंहटाएं

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