यशवन्त कोठारी का आलेख - गुलाबी नगरी की गुलाबी दीपावली

गुलाबी शहर की दीपावली पिछले कुछ वर्षों से सजावट तथा रोशनी की जगमागाहट के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध हो गयी हैं, देश के विभिन्‍न हिस्‍सों से लोग बाग दीपावली देखने हेतु जयपुर आते हैं और राजस्‍थानी मेहमान नवाजी का लाभ उठाते है, पिछले वर्ष तो दीपावली को देखने हेमा मालिनी तक आई।

दीपावली के दिन इस शहर की हालत यह हो जाती है कि अन्‍धकार पर रोशनी का एक वितान तन जाता है और अमावस्‍या की काली रात्री कहीं भी दिखाई नहीं देती, क्‍यों न हो आखिर जयपुर लक्ष्‍मी पुत्र का शहर जो है।

नव वधु की तरह सजे-धजे बाजार, खूबसूरत चौड़ी सड़कें साफ सुथरे गुलाबी पुते मकान और मदमाती मस्‍ती का आलम। सांझ ढ़लने के साथ साथ घर परिवार के लोग रोशनी देखने उमड़ पड़ते हैं, पूर्व के पेरिस की छटा दीपावली के दिन दिखते ही बनती है। अस्‍सी फुट ऊंचा मंच, स्‍वागत द्वार बनाया गया था पिछली बार।

जोहरी बाजार, राजपार्क, बापू बाजार, चांदपोल, किशनपोल, जवाहर नगर, सांगानेर, सोडाला से लगाकर शहर के गली मोहल्‍ले तक जगमग करते हैं मानो सितारों भरा आकाश ही जमीन पर उतार दिया गया हो।

रोशनी के पुंजों से सजे बाजार, दरवाजे, हवेलियां, होटल मन्‍दिर, चौराहे, दुकानें और जाने क्‍या क्‍या।

जोहरी बाजार के चोपड़ वाले नुक्‍कड पर कामदानी का आकर्षक गेट बनाया गया जो 250 वर्ष पुरानी हस्‍तकलम का एक नायाब नमूना बनकर खड़ा था। त्रिपोलिया में शहनाई की धुन थी तो जोहरी बाजार में बैंड और शहर के बाहर जयपुर के करोल बाग याने राजापार्क की सजावट तो मानों स्‍वर्ग को मात करती थी। समूचे राजापार्क को झाड़फानूसों, हैलोजन बल्‍बों और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था अब यदि इस रोशनी में लोगों के दिल में उमंग, उल्‍लास हिलोरे लेने लगे तो क्‍या आश्चर्य।

शहर नहीं इन्‍द्रपुरी लग रहा था जयपुर और रोशनी ही रोशनी आतिशबाजी ही आतिशबाजी।

लक्ष्‍मी जी का ऐसा स्‍वागत ऐसा भव्‍य और दिव्‍य, अलौकिक स्‍वागत षायद ही किसी शहर में लोग करते होंगे। व्‍यापार मण्‍डल ही नहीं व्‍यक्‍तिगत स्‍पर्धा भी कम नहीं उपर से पुरस्‍कारों के ढेर, आखिर क्‍यों न हो जयपुर अपनी परम्‍परा, अपनी संस्‍कृति, अपने गौरवपूर्ण अतीत को भूल थोड़े ही सकता है।

दीपोत्‍सव के इस मंगलमय अवसर पर जयपुर की छठा देखते ही बनती है। अगली दीपावली पर भी जयपुर की मन मोहक, सुरंगी, इन्‍द्रधनुषी छटा छाई रहेगी।

पूरे शहर को सजाने, संवारने निखारने में नर नारी प्रशासन और व्‍यापार मण्‍डलों का अद्‌भुत योगदान होता है इस अवसर पर साम्‍प्रदायिक सद्‌भाव और स्‍नेह का अद्‌भुत संगम होता है क्‍या हिन्‍दू, क्‍या मुसलमान, क्‍या सिख क्‍या ईसाई सभी दीपावली भरपूर आनन्‍द और सौहार्द के साथ मनाते हैं। मुस्‍लिम बहुल इलाकों में भी दीपावली की सजावट होती है और खूब होती है, दीपावली जयपुर का ही नहीं सभी का सबसे खूबसूरत और शानदार त्‍यौहार है इसे शानदार तरीके से मनाइये।

0 0 0

यशवन्त कोठारी

86, लक्ष्‍मीनगर, ब्रह्मपुरी बाहर

जयपुर - 302002

फोन - 2670596

-----------

-----------

3 टिप्पणियाँ "यशवन्त कोठारी का आलेख - गुलाबी नगरी की गुलाबी दीपावली"

  1. गुलाबी नगरी की हर बात ही निराली है!
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना!

    उत्तर देंहटाएं
  2. कोठारी जी ! दीप पर्व पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं .. आज आपका ये लेख चर्चामंच पर है...dhanyvaad www.charchamanch.com

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.