शनिवार, 27 नवंबर 2010

विजय वर्मा की हास्य कविता – कवि का चक्कर

 

हास्य हास्य व्यंग्य hasya hasya-vyangya vyangya

एक बार यमदूत

एक कवि के चक्कर में पड़ गया

गया था उसकी जान लेने

पर अपनी देने पर उतर गया.

 

कवि के पास जाकर बोला--

अपनी आखरी कविता पढ़ जाओ,

दस तक गिनता हूँ,तबतक

इस भैंसे पर चढ़ जाओ.

 

कवि  मन ही मन मुस्कुराया

बहुत दिनों बाद कोई मुल्ला पाया.,

कवि बोला ,आओ आओ
कुछ कविता सुन लो ,

पेट-रस,क्रिकेट -रस ,खेल-रस ,रेल-रस

महंगाई-रस ,बेहयाई-रस

चाहे जो चुन लो.

 

चार कविता सुनने पर चाय-नास्ता मुफ्त है.

परिस्थिति-किचेन से बेलन,चिमटा आ सकते है,

पर इसी में तो कविता सुनने का लुत्फ़ है.

शर्त-घरवाली का चंडी-रूप देखकर घबडाना नहीं

कुछ थाली-ग्लास झेलकर भी हड़बड़ाना नहीं.

 

सावित्री की तरह पीछा करेगी

सिर्फ एक इच्छा  करेगी---

पर उसकी बातों में मत आना.

कहेगी- भूलकर भी इस कवि के बच्चे को

वापस मत लाना.  

 

इतना कहकर कवि भैंसे पर चढ़ा

भैंसा आगे बढ़ा

कवि ने मुँह खोला

उधर चित्रगुप्त का सिंहासन  डोला.

अभागा! किस पापी को ला रहा है

खुद तो फंसा ही है

मुझे भी फंसा रहा है.

 

कवि ने राग अलापा

शुरू किया अपना स्यापा.

यम ने रोका, कवि को टोका

रे कवि! तू चुप ही चल.

 

कवि गुस्साया, खूब भिन्नाया-

रे यम! तू सुनता चल,

अगर कुछ गड़बड़ की तो

राजनीति-रस पढ़ दूंगा ,या फिर

चीनी, पेट्रोल, लहसुन, प्याज पर ही

कुछ नया गढ़ दूंगा.

 

आखिर यम जान पर खेल गया

मन मार कर कवि को झेल गया.

चित्रगुप्त के पास जाकर बोला -

सर! अब आप अपना जॉब कीजिये.

जल्दी से इसका हिसाब कीजिये.

 

चित्रगुप्त ने खाता खोला और  

कवि से बोला---

सुनो ! तुमने साहित्य की बहुत हानि की है

जबतक तक चला है खूब मनमानी की है

लोगों को पकड़कर जबरदस्ती बैठाया है

लोग रोते  रहे पर तुमने कविता सुनाया है.

 

चप्पल,टमाटर और अंडे

तुम्हारे  कारण बर्बाद हुए हैं,

तुम्हारे सूरत से फायदा उठा कर

लुच्चे-लफंगे आबाद हुए हैं.

 

इस सब का तुम्हें पाप लगेगा

इसके अलावा  आधा दर्जन बच्चे और

इकलौती बीवी का श्राप लगेगा.

 

इस सब का दंड पाना होगा

जितने दिनों तक कविता किये हो

उतने दिनों के लिए नर्क जाना होगा.

यह सुनकर धर्मराज दूत को बुलाने लगे,

उधर मौका पाकर कवि जी  कविता सुनाने लगे.

 

कविता सुनकर गधे रेंकने लगे

श्रोताओं को जो मिला फेंकने लगे.

तभी एक दूत आया  ,पूछा

साहब! दूसरा लाऊं?

चित्रगुप्त ने कहा--अभी बहुत थका हूँ

अभी मत लाना.

 

चाहे और कुछ लाना ,पर

कवि मत लाना.

.

v k verma,sr.chemist,D.V.C.,btps
vijayvermavijay560@gmail.com

10 blogger-facebook:

  1. सुनो ! तुमने साहित्य की बहुत हानि की है

    जबतक तक चला है खूब मनमानी की है

    लोगों को पकड़कर जबरदस्ती बैठाया है

    लोग रोते रहे पर तुमने कविता सुनाया है.
    हा हा हा सही बात है। अच्छा लगा व्यंग। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह ! मज़ा आ गया
    आखिर कवि से यम भी घबरा गया
    ये तो कवि का ओहदा बढा गया

    उत्तर देंहटाएं
  3. कवि की दुर्दशा तो हम बतलाये रहे ,पर
    सबसे बढ़िया आपके प्रतिक्रियाएं रहें.
    धन्यवाद्.

    उत्तर देंहटाएं

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