प्रभुदयाल श्रीवास्तव की ग़ज़ल

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ग़ज़ल

घोड़े पुराने थक गये हैं चूर हैं|
हम सवारी के लिये मजबूर हैं|


है आदमी के पास कितना आदमी
पर दिलों से हाय मीलों दूर हैं|

हाथ में हंटर लिये मालिक खड़े
हाथ जोड़े जो खड़े मजदूर हैं|

कायदों को छोड़कर जो आ गये
फायदे उनको मिले भरपूर हैं|

सेंकना हो सेंक जितनी रोटियां
सामने लाशों भरे तंदूर हैं|

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2 टिप्पणियाँ "प्रभुदयाल श्रीवास्तव की ग़ज़ल"

  1. कायदों को तोड जो आ गये, फ़ायदे उनको मिले भरपूर हैं। ख़ूबसूरत शे'र , प्रभुदयाल जी मुबारकबाद के मुस्तहक़ हैं।

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  2. कमेंट्स देने के लीये धन्यवाद‌

    प्रभुदयाल‌

    उत्तर देंहटाएं

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