शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

राजीव श्रीवास्तवा की बाल-कविता - बच्चों की दीवाली

 

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देखो-देखो आई दीवाली ,

ढेरो खुशियाँ लाई दीवाली ,

जग-मग जग-मग दीप जलाओ ,

प्यार जताओ ,गले लगाओ !

 

पापा नये कपड़े सिलवाते ,

घर में रंग रोगन करवाते ,

लक्ष्मी माँ का पैर बनालो ,

कई रंगों से उसे सजालो !

 

चीनी के हाथी और घोड़े ,

सब चख लेना थोड़े-थोड़े ,

मिट्टी का तोता भी लाओ ,

उसको अपने गीत सुनाओ !

 

कितनी सुंदर झालर और लडियाँ ,

जल उठती ढेरो फुलझड़ियाँ ,

गोल-गोल सी चरखी घूमे ,

राकेट उड़े आसमान को चूमे !

 

अपने हाथों से दीप जालाओ ,

लाइन में रख कर रेल बनाओ ,

टिम-टिम कर के जलते सारे ,

कितने सुन्दर ,कितने प्यारे !

 

हर तरफ होता धूम धड़ाका ,

ज़ोर ज़ोर से बजता पटाखा ,

आनर से सब रोशन हो जाए ,

टिकिया जलाओ साँप बन जाए !

 

एक बात का रखना ध्यान ,

बता रहा हूँ अपना मान ,

जब भी पटाखा तुम जलाओ ,

बड़ों को अपने पास बुलाओ !

 

दीवाली में खूब मौज मनाओ ,

दुश्मन को भी गले लगाओ ,

हाथ मिला कर प्यार जताओ ,

"हैप्पी दीवाली" कह के आओ !

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(सारे बच्चों को राजीव अंकल की तरफ से ढेर सारी

शुभ कामनाएं-हैप्पी दीवाली' आप सभी को)

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

4 blogger-facebook:

  1. सराहनीय लेखन........
    +++++++++++++++++++
    चिठ्ठाकारी के लिए, मुझे आप पर गर्व।
    मंगलमय हो आपके, हेतु ज्योति का पर्व॥
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  2. दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं

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