एस. के. पाण्डेय की बालदिवस विशेष रचना - चूहे की चोट

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micky mouse

(१)

चाहे बड़ा हो चाहे छोट ।

पेट के कारण नाना खोट ।।

चूहा खड़ा बोरी के ओट ।

खाए गेहूं दाना मोट ।

गिर गयी बोरी आई चोट ।

लेकर दस रूपये का नोट ।।

(२)

पहुँच गया डॉक्टर के घर ।

बोर्ड देखकर गया सिहर ।।

हुआ वही जिसका था डर ।

सबसे अच्छा जाऊँ मर ।।

(३)

रजिसट्रेसन व कंसलटेसन की फीस ।

पर्चा लिखाई अलग से बीस ।।

जाँच का लगता बीस-पचीस ।

जाँच कराई भी दस-बीस ।।

दवाई का कम से कम तीस ।

हे राम बचाओ अग़ जग ईस ।।

(४)

डॉक्टर घूमें यहाँ तमाम ।

सब लिए झोली ढूढें दाम ।।

गरीब के आये,  न कोई काम ।

चूहा पहुँचा अपने धाम ।।

(५)

चुहिया ने तब दिया दवाई ।

ढूंढ़ के जो वह खेत से लाई ।।

दो दिन में हुआ  चूहा ठीक ।

पकड़ा फिर  से पुरानी लीक ।।

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एस. के. पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.) ।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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3 टिप्पणियाँ "एस. के. पाण्डेय की बालदिवस विशेष रचना - चूहे की चोट"

  1. देशी उपचार पद्धति काम कर गई.

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  2. अच्छी बाल कविता, ऐसी कवितायें पाठ्य पुस्तकों में कुछ जोड़ घटाकर ज़रूर शामिल की जानी चाहि्ये।

    उत्तर देंहटाएं

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