रविवार, 14 नवंबर 2010

राजीव श्रीवास्तवा की बालदिवस विशेष कविता - चाचा तुमसे मिलने आया हूँ !

 

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आज तुम्हारे जन्म दिन पर,

चाचा तुमसे मिलने आया हूँ,

बड़ा सा कोई गिफ्ट नहीं है,

बस एक गुलाब तोड़ कर लाया हूँ,

आप बच्चों के प्यारे साथी हो,

बस प्यार जताने आया हूँ,

आज तुम्हारे जन्म दिन पर

चाचा तुमसे मिलने आया हूँ !

.

मुझको अपने गले लगा लो,

गोद में लो हवा में उछालो,

तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान,

बच्चो में भर देती है जान,

तुमको अपना हाल बताने,

और दिल का दर्द दिखाने आया हूँ,

आज तुम्हारे जन्म दिन पर,

चाचा तुमसे मिलने आया हूँ !

.

मेरा कोई दोस्त नहीं है,

सब मुझसे झगड़ा करते हैं,

मुझे निर्धन का बच्चा कहते,

और ताने मारा करते हैं,

आप मेरे दोस्त बन जाओ,

यही विनती करने आया हूँ,

आज तुम्हारे जन्म दिन पर,

चाचा तुम से मिलने आया हूँ !

.

केक के लिए पैसे नहीं थे,

सो खाली हाथ ही आया हूँ,

गुड की एक छोटे से ढेली,

उधर माँग कर लाया हूँ,

मेरे हाथों से खा लेना,

मैं बड़े प्यार से लाया हूँ,

आज तुम्हारे जन्म दिन पर,

चाचा तुम से मिलने आया हूँ !

.

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

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