बुधवार, 1 दिसंबर 2010

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का व्यंग्य - मत मर तू नेता

 

वे कल मर गये। कुर्सी के नीचे मरे। ऊपर मरते तो उनके पार्थिव शरीर को शास‌कीय सम्मान से फूँकना पड़ता। शासन का धन फुंकने से बच गया। वे अपोलो अस्पताल में मरे। कई महान लोग अपोलो अथवा आयुर्वेद संस्थान में मर जाते हैं। जसलोक भी मरने के लिये उत्तम जगह है। वे पचासी साल की अल्पायु में ही मर गये अपोलो ने ब्रह्मा के संविधान को चेलेंज करने एवं यमराज को अंगूठा दिखाने का भरसक प्रयत्न किया फिर भी वे मर गये। नेताओं को मुफ्त मिलती है आक्सीजन,इसलिये आक्सीजन कई सिलेंडर उनके सीने में उतार दिये गये किन्तु वे विपक्ष की तरह अड़ियल बने रहे और मर गये। वे इंसेंटिव केयर यूनिट में मरॆ। डाक्टरों की केयर के बाद भी मर गये।

देशवासियों ने अपील की थी अभी मत मरो, मरने पर क्षितिपूर्ति कैसे होगी परंतु विश्वास मत पारित कराये बिना ही मर गये। पहले विदेश गये थे मरने, पर डाक्टरों ने मना कर दिया। अपने अस्पतालों में नहीं मरने दिया, मारकर क्यों हाथ गंदे करें। कह दिया जाओ अपने हिन्दुस्तान में ही मरो,इसलिये वापिस आते ही मर गये। जिन्दा नेताओं को बहुत दुख हुआ उनके मरने का। प्रेस नोट जारी करना पड़े। देश का महान पुरुष दुनियाँ से उठ गया। त्याग और बलिदान की साक्षत मूर्ति उन्हें बताया गया।

कल के पहले तक वे अपने दल के विरोधी गुट के लीडर थे, बेइमान गद्दार और चापलूस थे परंतु मरते ही गुणों की खदान हो गये। कल ही एक रिक्शेवाला अपने रिक्शे में मर गया। वह मानवता का बोझ ढोता हुआ सड़क पर चला जा रहा था,अचानक दिल में दर्द उठा और वह अपनी सीट छोड़कर रिक्शे में भरती हो गया और मर गया। बिल्कुल पास होने के बावजूद‌ उसे किसी शहरवासी ने अस्पताल में भरती नहीं कराया, इसलिये वह अपने ही रिक्शे में भरती हो गया और मर गया। वह पच्चीस साल की लंबी आयु में मरा। दो बीवियों और चार बेटियों को बिलखता छोड़कर मरा। उसका पार्थिव शरीर रिक्शे में पड़ा है। आज तक‌ पड़ा है। उसे श्रद्धांजलि देने रिक्शा बिरादरी तक नहीं आई।

मृतक को गाली दे रहे हैं बिरादरी वाले। डर के मारे लोग रिक्शों में नहीं बैठ रहे हैं। चालक रास्ते में मर गया तो कैसे पहुँचेंगे घर,पुलिस का डर अलग से। क्यों मर जाते हैं बड़े नेता। कितना नुकसान होता है देश का। उनका त्याग और बलिदान मरने के बाद ही याद आता है। देश के सुरक्षाकर्मी और नेताओं के अंग रक्षक क्या करते हैं?यमराज डाकू मानसिंह सा नेता जी के शरीर से प्राण निकाल ले जाता है। और अंगरक्षक खड़े रह जाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था धरी रह जाती है। निकम्मे हैं सुरक्षाकर्मी सब के सब ।

नेता तू मत मर। यमराज से गोटी फिट कर। जैसे तू अल्पमत में सरकार चला लेता है। वैसे ही यमराज को चला। यमराज के कहने पर मत चल। सारा देश चाहे मर जाये किन्तु मत मर। देश की क्षतिपूर्ति कैसे होगी। मत मर तू नेता ।

6 blogger-facebook:

  1. man bha gayi aap ki rachna ,haasi bhi,sandesh bhi-badahai

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी पोस्ट

    उत्तर देंहटाएं
  3. कहां मरता है, किसी और रूप में आ जाता है नेता अमर है, अजर है, शाश्वत है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. भाई प्रभु जी ! क्या बताएं .......हमें भी बड़ा दुःख होता है जब कोई नेता मरकर नरक में चला जाता है ....सच्ची ....खलबली मच जाती है वहां ......सारी प्रजा त्राहि-त्राहि कर उठती है ........"आ गया स्सा ....... ये लोग तो नरक में भी चैन नहीं लेने देते ...बेड़ा गर्क हो इनका ....... "
    स्वर्ग -नरक से परे किसी ब्लेक होल में इनकी व्यवस्था करनी थी भगवान् जी को ......ये भगवान् भी न ......!

    उत्तर देंहटाएं
  5. कमेंट्स देने के लीये धन्यवाद‌

    प्रभुदयाल‌

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------