शनिवार, 11 दिसंबर 2010

नागेश पांडेय 'संजय' की बाल कविता – सर्दी बहुत सताती है

नागेश

सर्दी बहुत सताती है

सब पर रोब जमाती है , 

सर्दी बहुत सताती है .

कोहरा , पाला , ठिठुरन भैया , 

इसके साथी पक्के , 

मिल इनके संग खूब  छुड़ाती ,

बड़े-बड़ों के छक्के . 

तरस तनिक न खाती है .

सर्दी बहुत सताती है

मुंह इंजन - सा धुआं छोड़ता 

रहता है फक फक .

बूढी धूप रेंगती आती , 

छड़ी टेक ठक-ठक .

निबट नहीं ये पाती है . 

सर्दी बहुत सताती है

चिल-चिल  गर्मी इसके आगे 

पानी भरती है . 

पानी छूकर बड़ों- बड़ों की 

नानी मरती है .

ठुर-ठुर ठुर ठिठुरती है . 

सर्दी बहुत सताती है


डा. नागेश पांडेय 'संजय '

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डॉ. नागेश पांडेय "संजय"
शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश (भारत) - 242001.

1 टिप्पणी:

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