शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

संजय दानी की ग़ज़ल - तेरे तसव्वुर ने किया पागल मुझे

तेरे तस्व्वुर ने किया पागल मुझे,
कोई दवा भी है नहीं हासिल मुझे।

किरदार मेरा हो चुका दरवेश सा,
अपनी  ग़मों की पहना दे पायल मुझे।

ज़ख्मों की बारिश से बचूं कैसे सनम,
प्यारा है तेरी गलियों का दलदल मुझे।

कश्ती मेरी, लहरों की दीवानी हुई,
मदमस्त साहिल ने किया घायल मुझे ।

तेरी अदाओं ने मुझे मारा है पर,
दुनिया समझती, अपना ही क़ातिल मुझे।

या मेरी तू चारागरी कर ठीक से,
साबूत लौटा दे, या मेरा दिल मुझे ।

झुकना सिखाया वीर पोरष ने मुझे,
दंभी सिकन्दर,ना समझ असफ़ल मुझे।

मन्ज़ूर है तेरी ग़ुलामी बा-अदब,
है जान से प्यारा तेरा जंगल मुझे ।

तू खुदगरज़ सैयाद दानी, इश्क़ में  
तू मत समझना बेवफ़ा बुलबुल मुझे।

7 blogger-facebook:

  1. किरदार मेरा हो चुका दरवेश सा,
    अपनी ग़मों की पहना दे पायल मुझे...

    ग़ज़लों में कोई सानी नहीं आपका।

    .

    उत्तर देंहटाएं
  2. झुकना सिखाया वीर पोरष ने मुझे,
    दंभी सिकन्दर,ना समझ असफ़ल मुझे।
    वाह्! बहुत अच्छी लगी गज़ल। इसे पढवाने के लिये आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut khoobsurat gazal...jiske liye likhi ho aur vo padh le to uski balle balle ho jaye.:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. मन्ज़ूर है तेरी ग़ुलामी बा-अदब,
    है जान से प्यारा तेरा जंगल मुझे ।
    इस गुलामी पर आज़ादी न्योछावर है.
    अच्छी ग़ज़ल बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. ईन्डियन सीटीजन ब्लाग के मुखिया , ज़ील जी , निर्मला जी , अनामिका जी व विजय वर्मा जी का तहे-दिल आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  6. तेरे तस्व्वुर ने किया पागल मुझे,
    कोई दवा भी है नहीं हासिल मुझे।

    Matle me kaafiyaa set nahi ho paaya hai

    aur bhi kai jagah matraye gat badh rahi h...

    kathya ke hisaab se laajavaab hai aapki gajhal

    Dhanyavad..

    उत्तर देंहटाएं

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