सोमवार, 27 दिसंबर 2010

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की दो हास्य-व्यंग्य कविताएँ

भाग्य विधायक ‌

नेता गुंडा दादा तस्कर और पर पीड़ा दायक ‌

इन ‌ पांचों तत्वों से मिल ‌ कर ‌ बनता भाग्य विधायक ‌

 

इसी कड़ी में कुछ ‌ विशिष्ट ‌ और ‌ अधिक ‌ योग्य ‌ जो होते

जीत ‌ जीत ‌ कर ‌ के चुनाव ‌ वे ही संसद ‌ में होते

 

इनका जीवन ‌ अहा स्वर्ग ‌ है बड़े मजे से जीते

जितना खा सकते हैं खाते जो पी सकते पीते

 

ऐसे नर ‌ पुंग ‌ व ‌ श्रेष्ठों को करना रोज ‌ प्रणाम ‌

अपना सारा जीवन ‌ ही कर ‌ देना इनके नाम ‌

 

इनके पद ‌ चिन्हों पर ‌ चलकर ‌ तुम ‌ पद ‌ पा सकते हो

सारा स्वर्ग ‌ उठाकर ‌ अपने घर ‌ ला सकते हो

 

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बेटी का दर्जा मिले

सास ससुर रहते जहां कहलाती ससुराल ‌

साले , सरहज , सालियों का है मायाजाल |

 

है कोई षडयंत्र ये या समाज की चाल ‌

" स " से ही क्यों शुरू हैं संबंध ए ससुराल |

 

' स ' से चालू सास हैं ' स ' ससुरे की ढाल

साले , सरहज सालियां सब ' स ' की टकसाल |

 

क्यों इतना मजबूत है वर्चस्व ए ससुराल

सड़ू भाई भी शुरु ' स ' से यही सवा |

 

गुरू पढ़ाते क्यों नहीं ' स ' माने ससुराल ‌

' स ' के माने सरोता बंद करें तत्काल ‌ |

 

बार बार आता यही मेरे मन मैं ख्याल ‌

जहाँ सरोता काटता जुड़वाती ससुराल ‌ |

 

यदि सुसज्जित नहीं है साली से ससुराल ‌

जीजाश्री को जन्म भर रहता यही मलाल ‌ |

 

किंतु जहां पर सालियों वाली है ससुराल ‌

जीजा साली सरहजें साले सब खुश हाल ‌ |

 

होती है क्यों सिरफिरी बिटियों की ससुराल ‌

सासों नंदों से मिलें नहीं बहु के ख्याल ‌ |

 

होते रहते अनवरत हर दिन नये बवाल ‌

सास बहु के युद्ध से आ जाते भूचाल ‌ |

 

सास फुलाये मुंह ‍ पड़ी बहु फुलाये गाल ‌

कभी क्रोध में खींचते एक दूजे के बाल ‌ |

 

जहाँ कहीं टेढ़ी हुई नव ग्रहों की चाल ‌

सासों ने खिंचवाई है कुल वधुओं की खाल ‌ |

 

कहीं कहीं तो बहु भी करती बड़े धमाल ‌

न पकने दे सास की अपने चूल्हे दाल ‌ |

 

सासु मां दामाद को रखें सदा खुशहाल ‌

सास बहु संबंध क्यों होते खस्ताहाल ‌ |

 

बेटी के पति का जहां होता इतना ख्याल ‌

बेटे की पत्नी वहीं मानी गई जंजाल ‌ |

 

बेटी का दर्जा मिले बहुओं को तत्काल ‌

सास बहु संबंध पर फिर क्यों उठें बवाल ‌ |

 

यदि बहु भी सास को मां माने हर हाल ‌

क्यों न सासु प्रेम से चूमे उसका भाल ‌।

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4 blogger-facebook:

  1. बहुत प्रभावपूर्ण व्यंग ..
    प्रस्तुति हेतु आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. भाग्य विधायक और ससुराल , दोनों कवितायें अच्छी लगीं।

    उत्तर देंहटाएं

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