शनिवार, 18 दिसंबर 2010

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव की लघुकथा - प्रेम

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गर्मी की शोख शाम थी। हवा आहिस्ता-आहिस्ता बह रही थी। माडर्न वे से बने एक बंगले में दो सहेलियाँ सुहावने मौसम से खिलवाड़ कर रहीं थी। किसी भी चिन्ता से दूर वे दोनों अपने में ही मग्न थी।

अचानक एक युवती का ध्यान सामने सड़क पर जाते हुए एक स्मार्ट युवक पर पड़ी। वह चिहुंक पड़ी , देख री नीता ! वो जो लड़का सामने सड़क पर जा रहा है न , वही है मेरे दिल का हीरो। कहते -कहते उसके गाल सेब से हो गए। दूसरी युवती जिसका नाम नीता था , ने बड़े ग़ौर से एक नज़र उस युवक पर डाली। दूसरे ही क्षण उसके मस्तिष्क पर बल पड़ गए। वह हैरत में बोली, पर सविता वह युवक तो मेरा रोमियो है , तुम्हारा हीरो कैसे हो सकता है ! तुम्हें शायद वहम हो गया है , उसका नाम तो राकेश है ....।

नीता कुछ इस अंदाज़ मे बोली कि मानों कोई उसके राकेश को पीट रहा हो।

हुँह ! नाम में क्या रखा ! पर है वो मेरा हीरो ही।

पर मैं कहती हूँ , वह है मेरा रोमियो ही। ऐसा स्वीट स्मार्ट ....। नीता ने अपना दावा पेश किया।

अब तक दोनों मे ज़ंग छिड़ चुकी थी। दोनों यही सिद्ध करना चाहती थी कि वह स्मार्ट युवक उनका है। नीता तर्क देती है, मैंने उसके साथ न जाने कितनी नाइट फिल्में देखी हैं। कितनी ही बार दोनों क्लब गये हैं , साथ -साथ घूमे हैं। तुम क्या जानो उसने मुझे कितने प्रेज़ेन्टस दिये हैं।

सविता पीछे हटने वाली न थी, कुछ भी कहो पर है वो मेरा हीरो ही। अरे, हम दोनों ने तो कितनी रातें साथ-साथ बितायी हैं।

दोनों को आश्चर्य था कि ये सब बातें आज तक किसी ने नहीं बतायी। दोनों ही तर्क कुतर्क में नग्न होती जा रही थी। दोनों एक दूसरे को शह देने की जी तोड़ कोशिश कर रही थी .....। उस सड़क पर खड़े युवक के लिए।

अचानक दोनों ने देखा कि युवक के पास एक खूबसूरत कार आकर रुकी। उसमें से किसी शोख चंचल लड़की ने अपना सिर निकाला। युवक ने झुककर उसके गाल पर चुम्बन जड़ दिया। दोनों ने देखा वह युवक उस तरूणी के साथ हो लिया।

दोनों शर्म से सराबोर थीं।

दोनों एक साथ एक अंदाज़ में बोली -

-- स्याली बेशर्म !

-- स्याला कार के लिए !

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सतीश चन्द्र श्रीवास्तव

इलाहाबाद

5 blogger-facebook:

  1. इस बार के चर्चा मंच पर आपके लिये कुछ विशेष
    आकर्षण है तो एक बार आइये जरूर और देखिये
    क्या आपको ये आकर्षण बांध पाया ……………
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (20/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    उत्तर देंहटाएं

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