विजय वर्मा की हास्य व्यंग्य कविता : हम गधे हैं

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

हम गधे हैं.

हमारे देश आकर

सबके उल्लू सधे हैं,

हाँ ,जी ,हाँ !हम गधे हैं.

 

'अंकल सैम'भी आयें

अपना व्यापार बढ़ाएं

जबतक W T C नहीं गिरा था

आतंकवाद पर कुछ कह नहीं पायें

यहाँ आकर सबने सिर्फ

मीठे-मीठे भाषण पढ़े हैं.

हाँ ,जी,हाँ! हम गधे हैं.

 

तुम भी आओ,! जिआबाओ

अपनी डिप्लोमेसी दिखलाओ.

बिना कुछ ठोस वादा किये

१०० अरब तक व्यापार बढाओ .

हम पर तो 'अतिथि देवो भव;'के

कब से नशे चढ़े हैं.

हाँ ,जी ,हाँ!हम गधे हैं.

 

एक staple वीसा का तो

मसला अब तक हल हुआ नहीं

उनके होठों पर इस देश की खातिर

रहती है कभी दुआ नहीं.

शह देना हो या शस्त्र-नाभकिये

दुश्मन को तो भरपूर दिए

इनकी शह पर ही तो

दुश्मनों के हौसले बढे हैं.

हाँ,जी,हाँ! हम गधे हैं.

 

छीनी जिसने हजारों मील जमीन

भूल गए ,यह वही है चीन

इसने ही मानचित्र पे गलत

कश्मीर के नक़्शे गढ़े हैं

हाँ,जी,हाँ! हम गधे हैं

 

'६५' के आक्रमण की जिम्मेवारी

हमारे सर पर मढ़े हैं.

हाँ,जी हाँ!हम गधे हैं.

 

हे! निति-निर्धारक नेतागण

गाँठ बाँध लो अपने मन

जिसने इस पर विश्वास किया--

उसके आगे बस गड्ढे हैं.

हाँ,जी,हाँ! हम गधे हैं.

.--
v k verma,sr.chemist,D.V.C.,btps
vijayvermavijay560@gmail.com

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

6 टिप्पणियाँ "विजय वर्मा की हास्य व्यंग्य कविता : हम गधे हैं"

  1. बिल्कुल सही कह रहे हैं, हम गधे हैं जो गधों पर भरोसा करते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बिल्कुल सही कह रहे हैं, हम गधे ही हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक समसामयिक अच्छी रचना , बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. anshubhai ,indian citizen ,डॉ.दानी और रमेश जी
    आप सब का बहुत-बहुत आभार.,

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.