रविवार, 26 दिसंबर 2010

देवी नागरानी की दो ग़ज़लें

Devi Nagrani (Custom)

ग़ज़लः 100

 

पहचानता है यारों, हमको जहान सारा

हिंदोस्ताँ के हम है,  हिंदोस्ताँ हमारा

 

यह जंग है हमारी, लड़ना इसे हमें है

यादें शहादतों की देगी हमें सहारा

 

इस मुल्क के जवाँ सब, अपने ही भाई बेटे

करते हैं जान कुर्बाँ, जब देश ने पुकारा

 

जो भेंट चढ़ गए हैं, चौखट पे ज़ुल्मतों की

बलिदान से ही उनके, ऊंचा है सर हमारा

 

लड़ते हुए मरे जो, उनको सलाम देवी

निकला जुलूस उनका, वो याद है नज़ारा

 

मिट्टी के इस वतन की, देकर लहू की ख़ुशबू

ममता का क़र्ज़ देवी, वीरों ने है उतारा

 

**

ग़ज़लः 68

 

दिल की दिल से हुई बग़ावत है

प्यार भी क्या हसीं रक़ाबत है

 

जो सुकूँ-चैन था, वही छीना

दुश्मनों की यही रवायत है

 

हौसले हार कर भी कब टूटे

जीत की आस अब सलामत है

 

दूर क्यों मुझसे है मेरा साया

मुझको उसकी बड़ी ज़रूरत है.

 

इस तरह दिल को चूर-चूर किया

क्या बतायें कि कैसी हालत है.

 

कैसे साँझा कहूँ इसे लोगो

दर्द मेरा, मेरी अमानत है

 

इतनी क़ाबिल न थी कभी 'देवी'

दोस्तों की बड़ी इनायत है.

 

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7 blogger-facebook:

  1. ्बहुत ही सुन्दर रचनायें।

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  2. कैसे साझा करूं इसे लोगों,
    दर्द मेरा ,मेरी अमानत है।

    ख़ूबसूरत शे'र , सुन्दर ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  3. नए साल पर हार्दिक शुभकामना .. आपकी पोस्ट बेहद पसंद आई ..आज (31-12-2010) चर्चामंच पर आपकी यह पोस्ट है .. http://charchamanch.uchacharan.blogspot.com.. पुनः नववर्ष पर मेरा हार्दिक अभिनन्दन और मंगलकामनाएं |

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्छी पोस्ट , नववर्ष की शुभकामनाएं । "खबरों की दुनियाँ"

    उत्तर देंहटाएं
  5. हौसले हार कर भी कब टूटे
    जीत की आस अब सलामत है

    खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को भी सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं

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