विजय वर्मा के हाइकु

vijay-verma (Custom)

विषमता की खाई
बढ़ गयी है
विषमता की खाई
राम दुहाई
.
दहेज़ बिना
उठी ना डोली,तब
ज़हर खाई
.
भोजन नहीं
घर जिसके,लाये
कैसे दवाई.?

तंग हाल में
रह रही अकेली
रामु  की ताई

जल ना जाए
ससुराल में दीदी
चिंतित भाई.

झेल ना सकी
जाड़े की रात ,मरी
बुढ़िया माई.

 
v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS
BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

4 टिप्पणियाँ "विजय वर्मा के हाइकु"

  1. आज के हालात पर अच्छी कविता .....
    नव वर्ष की शुभकामनाये.......

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  2. सुन्दर हाइकू...हिन्दी में कूटोक्ति कहेंगे ना, या फ़िर कोई और शब्द हो तो सुझाए

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  3. मंजुला जी,डॉ.दानी और दुधवा लाइव जी
    आप सब को बहुत-बहुत धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं

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