एस के पाण्डेय की बाल कविता - - नकटी बिल्ली

बच्चों के लिए: नकटी बिल्ली

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(१)

कोई हो कितना बलवान ।

उसका हो चाहे जो मान ।।

चलती सदा न उसकी धाक ।

कट सकती उसकी भी नाक ।।

(२)

एक था चूहा एक बिलार ।

मची थी रहती उनमें रार ।।

चूहा छोटा पर होशियार ।

बिल्ली भी न माने हार ।।

(३)

कर दिया चूहे को परेशान ।

समझे इसको अपनी शान ।।

होकर के ज्यादा हैरान ।

चूहा सोचा लेगी जान ।।

(४)

करेगी क्या इससे भी ज्यादा ।

मरने को बैठा आमादा ।।

मैं बिल्ली का भी न आधा ।

बन सकता फिर भी मैं बाधा ।।

(५)

चूहा चला दबाते पांव ।

आ पहुँचा बिल्ली के गांव ।।

थी न बिल्ली घर में अपने ।

हो गया जो न सोचा सपने ।।

(६)

इधर-उधर से देखे झांक ।

छोटा था लेकिन चालाक ।।

छुपकर घर में जमाया ठाँव ।

भरे न, दूँगा ऐसा घाव ।।

(७)

आकर सोयी जभी बिलार ।

कर दिया उसने तीखा वार ।।

फौरन चूहा हुआ फरार ।

बिल्ली रोके खून की धार ।।

(८)

बनती थी वह ज्यादा घाक ।

काट दिया चूहे ने नाक ।।

मिल गई इज्जत उसकी खाक ।

चूहे ने थी उड़ाई नाक ।।

(९)

चूहे ने दिया ऐसा छाप ।

शरम के मारे अपने आप ।।

छोड़ दिया बिल्ली ने गांव ।

भरे भी कैसे मन का घाव ।।

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एस के पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.) ।
URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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1 टिप्पणी "एस के पाण्डेय की बाल कविता - - नकटी बिल्ली"

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