असग़र वजाहत का संस्मरण - 'फ़ैज' पर कुछ अलग ढंग से

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असगर वजाहत का एक संस्मरण ई-बुक पर पढ़िए उनकी अपनी ही हस्तलिपि में - 'फ़ैज' पर अलग ढंग से -




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2 टिप्पणियाँ "असग़र वजाहत का संस्मरण - 'फ़ैज' पर कुछ अलग ढंग से"

  1. नए साल पर हार्दिक शुभकामना .. आपकी पोस्ट बेहद पसंद आई ..आज (31-12-2010) चर्चामंच पर आपकी यह पोस्ट / रचना है .. http://charchamanch.uchcharan.blogspot.com.. पुनः नववर्ष पर मेरा हार्दिक अभिनन्दन और मंगलकामनाएं |

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  2. दुनिया के महान शायर फैज़ के बारे में वजाहत जी का यह संस्मरण फैज़ साब से ज्यादा वजाहत जी के संकोच को व्यक्त करने वाला है |किसी व्यक्ति से बिना मिले मिल लेने की खूबी इस संस्मरण में है |यही इसका सौन्दर्य है |

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