शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

प्रमोद भार्गव का कहानी संग्रह : मुक्त होती औरत (15) - परखनली का आदमी


mukt hoti aurat by pramod bhargava

(पिछले अंक में प्रकाशित कहानी 'जूली' से जारी...)

मुक्‍त होती औरत

 

pramod bhargava new

प्रमोद भार्गव

प्रकाशक

प्रकाशन संस्‍थान

4268. अंसारी रोड, दरियागंज

नयी दिल्‍ली-110002

मूल्‍य : 250.00 रुपये

प्रथम संस्‍करण : सन्‌ 2011

ISBN NO. 978-81-7714-291-4

आवरण : जगमोहन सिंह रावत

शब्‍द-संयोजन : कम्‍प्‍यूटेक सिस्‍टम, दिल्‍ली-110032

मुद्रक : बी. के. ऑफसेट, दिल्‍ली-110032

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जीवनसंगिनी...

आभा भार्गव को

जिसकी आभा से

मेरी चमक प्रदीप्‍त है...!

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प्रमोद भार्गव

जन्‍म 15 अगस्‍त, 1956, ग्राम अटलपुर, जिला-शिवपुरी (म.प्र.)

शिक्षा - स्‍नातकोत्तर (हिन्‍दी साहित्‍य)

रुचियाँ - लेखन, पत्रकारिता, पर्यटन, पर्यावरण, वन्‍य जीवन तथा इतिहास एवं पुरातत्त्वीय विषयों के अध्‍ययन में विशेष रुचि।

प्रकाशन प्‍यास भर पानी (उपन्‍यास), पहचाने हुए अजनबी, शपथ-पत्र एवं लौटते हुए (कहानी संग्रह), शहीद बालक (बाल उपन्‍यास); अनेक लेख एवं कहानियाँ प्रकाशित।

सम्‍मान 1. म.प्र. लेखक संघ, भोपाल द्वारा वर्ष 2008 का बाल साहित्‍य के क्षेत्र में चन्‍द्रप्रकाश जायसवाल सम्‍मान; 2. ग्‍वालियर साहित्‍य अकादमी द्वारा साहित्‍य एवं पत्रकारिता के लिए डॉ. धर्मवीर भारती सम्‍मान; 3. भवभूति शोध संस्‍थान डबरा (ग्‍वालियर) द्वारा ‘भवभूति अलंकरण'; 4. म.प्र. स्‍वतन्‍त्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन भोपाल द्वारा ‘सेवा सिन्‍धु सम्‍मान'; 5. म.प्र. हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन, इकाई कोलारस (शिवपुरी) साहित्‍य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में दीर्घकालिक सेवाओं के लिए सम्‍मानित।

अनुभवजन सत्ता की शुरुआत से 2003 तक शिवपुरी जिला संवाददाता। नयी दुनिया ग्‍वालियर में 1 वर्ष ब्यूरो प्रमुख शिवपुरी। उत्तर साक्षरता अभियान में दो वर्ष निदेशक के पद पर।

सम्‍प्रति - जिला संवाददाता आज तक (टी.वी. समाचार चैनल) सम्‍पादक - शब्‍दिता संवाद सेवा, शिवपुरी।

पता शब्‍दार्थ, 49, श्रीराम कॉलोनी, शिवपुरी (मप्र)

दूरभाष 07492-232007, 233882, 9425488224

ई-सम्पर्क : pramod.bhargava15@gmail.com

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अनुक्रम

मुक्‍त होती औरत

पिता का मरना

दहशत

सती का ‘सत'

इन्‍तजार करती माँ

नकटू

गंगा बटाईदार

कहानी विधायक विद्याधर शर्मा की

किरायेदारिन

मुखबिर

भूतड़ी अमावस्‍या

शंका

छल

जूली

परखनली का आदमी

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कहानी

परखनली का आदमी

कहानी रचनाकर में पूर्व प्रकाशित है. अतः कहानी पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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(समाप्त)

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पाठकों के पत्र-

अगस्‍त 2008 ‘हंस' की कहानी ‘मुक्‍त होती औरत' सचमुच थोपे हुए बन्‍धनों से मुक्‍त होने और ‘स्‍व' को महत्त्व देने वाली मार्मिक कहानी है। स्‍त्रीवाद के आलोक में देखा जाए तो इस कहानी का अपना एक महत्त्व है। यह कहानी है एक लड़की की, जिसे झूठी नैतिकता और सामाजिक बन्‍धनों का चोला ओढ़ाकर साध्‍वी बनने पर मजबूर कर दिया जाता है।

�ज्‍योति शुक्‍ला, कोलकाता (हंस-नवम्‍बर 2008)

‘मुक्‍त होती औरत' ‘हंस' में प्रकाशित होने के साथ ही चर्चा में आ गई थी। यह कहानी अपने कथ्‍य में ही नहीं, शैली और शिल्‍प की दृष्‍टि से भी समृद्ध है। कहानी में किस्‍सागोई के साथ-साथ गति, प्रवाह और उत्‍सुकता अन्‍त तक बनी रहती है। किसी भी विशिष्‍ट कहानी के सार तत्त्वों से यह कहानी ओतप्रोत है। प्रमोद भार्गव अच्‍छे साहित्‍यकार होने के साथ-साथ प्रतिष्‍ठित पत्रकार भी हैं। उनकी इस कहानी में कहानीकार की दृष्‍टि के साथ पत्रकार की खोजी दृष्‍टि भी है जो कई तरह के मुद्‌दे उठाती है तथा समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों पर ही चोट नहीं करती बल्‍कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे एड्‌स व यौन शिक्षा जैसे अभियानों पर भी प्रहार करती है।

�अरुण तिवारी, सम्‍पादक ‘प्रेरणा' भोपाल

इस संग्रह की कहानियों का मुख्‍य विषय है स्‍त्री केन्‍द्रित लैंगिकता। लैंगिकता मात्र स्‍त्री शरीर और उसकी आसक्‍ति से जुड़कर प्रकट होनेवाली प्रक्रिया नहीं है। बल्‍कि यह अन्‍य कई सामाजिक कारकों से नियन्‍त्रित एवं प्रभावित होनेवाली प्रक्रिया है। अतः सामाजिक असन्‍तुलन लैंगिक असन्‍तुलितावस्‍था का जनक है। इसलिए लैंगिकता को केन्‍द्र में रखकर लिखी जानेवाली कहानियाँ वास्‍तव में अनेक सामाजिक अन्‍तर्विरोधों का आकलन हैं। लैंगिकता को काबू में रखकर ‘स्‍वस्‍थ' समाज की स्‍थापना के लिए लालायित होने के बजाय क्‍या यह बेहतर विकल्‍प नहीं है कि पहले लैंगिकता को मानवीय एवं मूल्‍य सम्‍पन्‍न बनाएँ, क्‍योंकि एक स्‍वस्‍थ समाज में ही स्‍वस्‍थ लैंगिकता टिक सकती है। ‘मुक्‍त होती औरत' की स्‍त्रीजन्‍य कहानियाँ इस विराट सत्‍य को वाणी देती हैं।

�शीना एन.बी. त्रिचूर, केरल

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