एस के पाण्डेय की बाल कविता - उपहार

 
chooha 
                   (१)
 
मौसी मुझे ना डालो मार ।
दूँगा मैं  तुमको   उपहार ।।
बिल्ली बोली तूँ  होशियार ।
छोड़ूँ कैसे लगा शिकार ।।
 
             (२)
 
मौसी मानों तुमको हार ।
दूँगा मैं कुछ करो बिचार ।।
लालच में आ गयी बिलार ।
बोली बेटा तुझको प्यार ।।
 
        (३)
 
चूहा भागा कहे पुकार ।
'जीत-हार' का दे दिया हार ।।
वादा पूरा हुआ हमार ।
बिल्ली बोली तूँ मक्कार ।।
जा हो तेरा सत्यानास  ।
मौसी को कर दिया निरास  ।।
 
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              डॉ. एस के पाण्डेय,
              समशापुर (उ. प्र.)  ।

     URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/


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2 टिप्पणियाँ "एस के पाण्डेय की बाल कविता - उपहार"

  1. बेहद शानदार बाल-कविता
    लोहड़ी,पोंगल और मकर सक्रांति : उत्तरायण की ढेर सारी शुभकामनाएँ।

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  2. अच्छी कविता बधाई ,संयोजन में थोड़ी सरलता आ जाये तो ये एक अच्छी बाल कविता का दर्जा पाने में सक्छम है।

    उत्तर देंहटाएं

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