श्याम गुप्त की त्रिपदा अगीत गज़ल...बात करें...

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shyam gupta tripada gazal

ग्न अतीत की क्या बात करें |
व्यर्थ बात की क्या बात करें |
अब नवोन्मेष की बात करें |


रेतीली मरु भूमि, गरीबी,
में कवि ! जीते हो सदियों से;
कुछ हरियाली की बात करें |


यदि महलों में जीवन हंसता,
झोंपडियों में भी जीवन है ;
क्या ऊँच नीच की बात करें |


शीश झुकाएं क्यों पश्चिम को,
क्यों अतीत से हम भरमायें ;
कुछ आदर्शों की बात करें |


जीवन गम व खुशी दोनों है,
बात नहीं यदि कुछ बन पाए;
कुछ भजन-ध्यान की बात करें |


शास्त्र , बड़े-बूढ़े औ  बालक,
है सम्मान देना-पाना तो;
मत श्याम, व्यंग्य की बात करें ||

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5 टिप्पणियाँ "श्याम गुप्त की त्रिपदा अगीत गज़ल...बात करें..."

  1. धन्यवाद,..’रचनाका’’भारतीय नागरिक’ अब ’नया सवे्रा’ होने वाला है....नव-वर्ष की शुभकामनायें...
    ---त्रिपदा अगीत गज़ल... त्रिपदा अगीत(१६-१६ मात्रा की तीन पन्क्तियां की, अतुकान्त ) मालिका है....प्रथम छंद में तीनों पन्क्तियों में वही अन्त्यानुप्राश, अन्य छन्दों में अन्तिम पन्क्ति में वही अन्त्यानुप्राश....
    ----प्रयत्न करें....

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी अभिव्यक्ति। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. धन्यवाद दानी जी.....ट्राई करें...

    उत्तर देंहटाएं

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