बुधवार, 5 जनवरी 2011

संजय दानी की ग़ज़ल

जब से दिलों की गलियों में ईमान बिकते हैं,

बस तब से राहे-इश्क़ बियाबान लगते हैं।

 

ग़म से भरी है दास्तां मेरी जवानी की,     

बाज़ारे-इश्क़ मे सदा अरमान सड़ते हैं।

 

साहिल के घर का ज़ुल्म बहुत झेला है मैंने,

मंझधार में ही सब्र को परवान चढ़ते हैं।

 

दिल में नशा शराब का चढ़ता नहीं कभी,

बस साक़ी के लिये ही गिरेबान फटते हैं।

 

हर काम पहले थोड़ा कठिन लगता है मगर,

कोशिश करोगे दिल से तो आसान होते हैं।

 

ग़म के चराग़ों से मेरा रिश्ता पुराना है     ,

सुख के हवाओं में कहां इंसान बनते हैं।

 

लबरेज़ है हवस से ,मुहब्बत का दरिया अब,

बस चंद वक़्त के लिये तूफ़ान उठते हैं।

 

सैयाद जब से बुलबुलों को बेच आया शहर,

तब से दरख़्ते-शहर परेशान दिखते हैं।

 

इस मुल्क की विशेष पहचान है दुनिया में,

हिन्दू के मंदिरों में मुसलमान झुकते हैं।

7 blogger-facebook:

  1. बहुत बहुत सुन्दर गजल , बधाई हो |

    उत्तर देंहटाएं
  2. अन्त वाला शेर समझ में नहीं आया.. विरोधाभासी है.. बाकी सब बहुत बढ़िया है...

    उत्तर देंहटाएं
  3. "हर काम पहले थोड़ा कठिन लगता है मगर,

    कोशिश करोगे दिल से तो आसान होते हैं।"----
    --शानदार गज़ल...

    ---भारतीय नागरिक ने सही फ़रमाया..हिन्दू के मंदिरों में मुसलमान(कब-कहां ?) झुकते हैं। --हां उल्टा तो होता है....

    उत्तर देंहटाएं
  4. डागेशवर साहू जी , भारतीय नागरिक के मुखिया , नया सवेरा के मुखिया, श्याम गुप्ताजी व आदरणीया अनुपमा जी का अभार।

    नया सवेरा व श्याम गुप्ता जी से -साहित्य में बहुत सारी बातें सांकेतिक होती है , भले ही उलट हो रहा हो पर ऐसी बातें सकरात्मक सोच को प्रवाहित करने में कभी कभी सेतु का काम करते हैं । हिन्दू भी मुसलमानों के इबादत गाह में झुक रहे हैं तो भी यह शे'र अपना संदेश देने में सक्छ्म है, बहरहाल इन्टरएक्शन के लिये धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. नया सवेरा व श्याम गुप्ता जी से -साहित्य में बहुत सारी बातें सांकेतिक होती है , भले ही उलट हो रहा हो पर ऐसी बातें सकरात्मक सोच को प्रवाहित करने में कभी कभी सेतु का काम करते हैं । हिन्दू भी मुसलमानों के इबादत गाह में झुक रहे हैं तो भी यह शे'र अपना संदेश देने में सक्छ्म है

    Aapse sahmat hu dani ji

    Matle ne jis bebaaki ke saath gazal ki shuruat kari vah makte tak jari rahi.

    हर काम पहले थोड़ा कठिन लगता है मगर,

    कोशिश करोगे दिल से तो आसान होते हैं।

    isme kaafiye me gadbad lag rahi h

    उत्तर देंहटाएं

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