शनिवार, 29 जनवरी 2011

वीनस 'जोया' की कविता - कुछ रिश्ते - नातों की यादें

कुछ रिश्ते - नातों की यादें


कुछ रिश्ते - नातों की यादें
मिट्टी की खुशबू की तरह होती हैं
वक़्त की धूप और जिंदगी की हवा
मिट्टी को सुखा - रुखा कर जाती हैं
यूँ लगता है मानो....सब ख़तम हुआ
............और अब मिट्टी पक चुकी है

पर इक हलकी सी बौछार के साथ

वही महक.....वही खुशबू .....और

वही गीलापन सब लौट आता है
और तब मालूम होता है .......
.............माजी के रिश्तों की यादें
अभी भी रची बसी पड़ी हैं.........
...............इस मिट्टी के कणों में
.................और मिट्टी अभी भी कच्ची है !

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वीनस की अन्य रचनाएँ पढ़ें उनके ब्लॉग - http://venusjun25.blogspot.com/ पर.

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7 blogger-facebook:

  1. मेरे व्यक्तिगत अनुभव ने कविता का रूप ले लिया है.
    धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  2. यह तो गद्य है कुछ लय व गति होनी चाहिये ताकि कविता कहाये.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच है,

    पर कुछ रिश्ते भुला देना ही बेहतर होता है

    उत्तर देंहटाएं
  4. अकड़ कहती है कि रिश्ते-नाते ख़त्म ...पर सचमुच वे कभी ख़त्म नहीं होते .....दुबके रहते हैं ...वक्त की नजाकत को पहचानते हैं ...और मौक़ा मिलते ही बिखेरने लगते हैं अपनी ख़ुश्बू .....

    उत्तर देंहटाएं
  5. पर इक हलकी सी बौछार के साथ

    वही महक.....वही खुशबू .....और

    वही गीलापन सब लौट आता है
    और तब मालूम होता है .......
    .............माजी के रिश्तों की यादें
    अभी भी रची बसी पड़ी हैं.........
    ...............इस मिट्टी के कणों में
    .................और मिट्टी अभी भी कच्ची है !
    Nihayat sundar bhavna!

    उत्तर देंहटाएं
  6. पर इक हलकी सी बौछार के साथ

    वही महक.....वही खुशबू .....और

    वही गीलापन सब लौट आता है

    खूबसूरती से लिखा है ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. vijay वर्मा जी ..,Learn By Watch ...,kshama जी ,, संगीता दी .., बाबा [:)]....Raviratlami जी ......आप सब का तह ए दिल से शुर्किया...युहीं साथ बनाये रखें ...
    Dr. shyam गुप्ता जी ...आपके सुझाव ध्यान में रखूंगी...यहाँ तक आने के लिए शुर्किया

    उत्तर देंहटाएं

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