शनिवार, 22 जनवरी 2011

शशांक मिश्र भारती की बाल कविताएँ

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शशांक मिश्र ‘‘भारती'' के बालगीतः-

-ः भारत के हम बच्‍चे हैं ः-

राष्‍ट्र भक्‍ति है शान हमारी

देश को अर्पण जान हमारी

देश के सपूत सच्‍चे हैं,

भारत के हम बच्‍चे हैं।

 

रुक ना सके जो तूफानों से

तीर तलवार और कटारों से,

हैवानों के गलत प्रचारों से

शौर्यशाली हम सच्‍चे हैं।

भारत के हम बच्‍चे हैं।

 

नदी बहे या कोई नाला

पर्वत या कोई पिरोये जाला,

जने अशुभ में शुभ की माला

बने कर्मवीर सच्‍चे हैं,

भारत के हम बच्‍चे हैं।

 

अलगाव बढ़े या हो प्रदूषण

हिंसा फैले या स्‍वार्थी दूषण,

पायेंगे विजय समझ आभूषण

दृढ़ प्रतिज्ञ बने सच्‍चे हैं,

भारत के हम बच्‍चे हैं।

 

लव-कुश ध्रुव प्रहलाद बनेंगे

बन एकलव्‍य गुरु बात मनेंगे,

सिंह शावक के दांत पढ़ेंगे।

भारत से साहसी सच्‍चे हैं,

भारत के हम बच्‍चे हैं।

-------

-ः तिरंगा  -

विश्‍व का विजेता हो तिरंगा

रहे सदैव ही ऊँचा................,

देश शक्‍ति और हर्ष सभी को

न मन हो किसी का नीचा।

 

इसको लेकर ही हम सब

क्षण-क्षण मे आगे बढ़े थे

दिया खून पर ऊँचा रक्‍खा

फिरंगियो से खूब लड़े थे।

 

इसके नीचे ही पाया हमने

आजादी का स्‍वर्णिम सबेरा,

इसके नीचे ही निर्णय हो

कर्तव्‍य निष्‍ठता का मेरा॥

 

........

हम आगे बढ़ते जाएंगे..

हम भारत के छोटे बच्‍चे

भय न खायें सीधे सच्‍चे,

हम आगे बढ़ते जाएंगे.............।

 

करके प्रतिदिन कठोर श्रम

भारत को स्‍वर्ग बनायेंगे,

कांटों में भी फूल सजाकर

हम आगे बढ़ते जाएंगे..................।

 

यह भूमि है राणा वीर शिवा की

आजाद-भगत गांधी-सुभाष की,

हम सब मिलकर गायेंगे

हम आगे बढ़ते जाएंगे...........।

 

हिंसा, घृणा और अनाचार

चहुं ओर बढ़ रहे अत्‍याचार,

बन कर्मवीर हम ढाएंगे

हम आगे बढ़ते जाएंगे.........।

 

अध्‍यात्‍म और नैतिकता का

वसुधैव कुटुम्‍बकम्‌ मानवता का,

हम संदेश विश्‍व में गायेंगे

हम आगे बढ़ते जाएंगे.........।

-----

शशांक मिश्र भारती

दुबौला-रामेश्‍वर-262529

पिथौरागढ़ उ.अखण्‍ड

दूरवाणी-09410985048

shashank.misra73@rediffmail.com

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