सोमवार, 31 जनवरी 2011

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - सीडी नाम सत्य है

सीडी है तो एक छोटी सी चीज, मगर काम बड़े-बड़े कर देती है। सीडी में कुछ भी भरा जा सकता है। सीडी कभी भी कहीं भी बांटी जा सकती है। पत्रकार वार्ता में एक सीडी को बांट कर सरकार को गिराया या बचाया जा सकता है। किसी को झूठे बलात्‍कार के मुकदमे में फंसाया जा सकता है। सीडी के कारण एक राष्ट्रीय दल के अध्‍यक्ष को नौकरी से जाना पड़ा। सीडी के कारण कई मंत्रियों, अफसरों, नेताओं के कैरियर कब चौपट हो जाये कोई कह नहीं सकता। ताजा समाचार ये है कि काले धन और विदेशों में छिपे धन की जानकारी की सीडी बाजार में आ गई है, पता नहीं विश्‍व में कितनी सरकारों को जाना पड़ सकता है।

बाजार में हर काम की सीडी उपलब्‍ध है। गोपनीयता को सरे राह खोलती ये सीडियां सांप-सीढ़ी से ज्‍यादा खतरनाक साबित हो रही है। सीडी में कुछ भी बदला जा सकता है। राम के शरीर पर श्‍याम का चेहरा लगाकर बलात्‍कार, हत्‍या, रिश्‍वत के सीन दिखाये जा सकते हैं। पूंजीपति, उद्योगपति, नेता सभी को बेनकाब करने का अछूता उपाय है सीडी। तथ्‍य हो या नहीं सीडी का अखबारों या चैनलों के दफ्‌तर में पहुँचने की खबर मात्र से ही देश-दुनिया में सब कुछ कांपने लग जाता है। वास्‍तव में राम नाम सत्‍य है के बजाय अब तो सीडी नाम सत्‍य है, का समय आ गया लगता है। एक सीडी कईयों का राम नाम सत्‍य कर सकती है।

फिल्‍मी कलाकारों, कास्‍टिंग काउचों भ्रष्ट पत्रकारों, की सीडियां बाजार में उपलब्‍ध है। देखो, आनन्‍द लो या फिर किसी को फांसो। सीडी बनाने वाले भी सीन पर मौजूद है, आप कह दो और मन माफिक सीडी तैय्‌यार। जब चाहो तब अखबार, चैनलों तक पहुँचा दो।

सीडी में अपराध भी है और अपराधी भी है। सीडी चलती है और दुनिया को भी चलाती है। मारती है। सीडी में क्‍या नहीं भरा जा सकता है, अर्थात सब कुछ समा जाता है सीडी में। सीडी में सारे खेल है सेल है। मेल है। एम एम एस․ के खटके हैं। रगड़े-लफड़े हैं। सुन्‍दरी है, शराब है,पैसा है, गोपनीय खाते है, हत्‍या, बलात्‍कार, तस्‍करी के वादे है, सब कुछ है प्‍यारे सीडी में क्‍योंकि सीडी नाम सत्‍य है।

बुद्धिजीवी सीडी के सहारे कई देशों का दौरा कर के आ जाता है, वो सेमिनार में सीडी की मदद से देश की तरक्‍की के आंकडे पेश करता है, ग्राफ, पावरपाइन्‍ट दिखाता है और देश बेचने की नई योजना पर काम करता है। छोटी सीडी बडी सीडी को खा जाती है। बडी सीडी पूरी कम्‍प्‍यूटर-रुपी व्‍यवस्‍था को खा जाती है।

आजादी है सब अपनी अपनी सीडी बना सकते हैं। मुझे मंत्री बनना है और इसके लिए ‘क' को मंत्रिमण्‍डल से निकालना जरुरी है सीडी की सेवायें ले, एक सीडी बनाकर बाजार में फेंक दे शायद आपका चान्‍स लग जाये। सीडी में सच-झूठ, सब चलता है।

सीडी में सच भरा है तो भी खतरा है और झूठ भरा है तो और भी ज्‍यादा खतरा है, मगर सीडी सरकारों का भाग्‍य तय करने लग गई है क्‍योंकि सीडी नाम सत्‍य है। एक सीडी बना लो भाई।

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यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर, जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

मो․․09414461207

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