मंगलवार, 4 जनवरी 2011

शशांक मिश्र‘‘भारती'' के बाल गीतः-

clip_image002

एकः-

जाड़े की ऋतु

-clip_image004

खुशियों को साथ लिए

सुन्‍दर सपने हजार लिए

ऋतु जाड़े की आ गई

पवन सर-सराने लगी

दांत बजवाने लगी

सतरंगी परिवेश लिए

ऋतु जाड़े की आ गई

सरदी के बढ़े हैं गात

धूप के घटे हैं गात

शीतल लहरों के साथ

ऋतु जाड़े की आ गई

धूप सभी के मन भाती

शीत लहर कंप-कंपी बंधाती

स्‍वर्णिम सौन्‍दर्य दिखाती

ऋतु जाड़े की आ गई।

---

दोः-

आया मौसम जाड़े का

&&&&&&&&&&&&&&&&&

clip_image006

खाओ-पीओ, झूमो-गाओ

आया मौसम जाड़े का,

नये-नये स्‍वेटर को पहनो

भाया मौसम जाड़े का

आइसक्रीम अब भाये नहीं

धूप सुहानी लगती है,

जाड़े में नहाने से भी अब

गुड़िया रानी डरती है,

गुल्‍लक को अब भरते जाओ

आया मौसम जाड़े का

खाओ-पीओ, झूमो-गाओ

भाया मौसम जाड़े का॥

--

तीनः-

हाथी दादा

----------

हाथी दादा आते हैं

clip_image008

पहन लबादा आते हैं

पंखे जैसे कानों को

झण्‍डे सा फहराते हैं,

लम्‍बी सूंड़ को वह अपनी

इधर-उधर लहराते हैं

---

डॉ. शशांक मिश्र ‘‘भारती''
दुबौला-रामेश्‍वर
पिथौरागढ़

1 blogger-facebook:

  1. तीनों बाल गीत अच्छे लगे मुबारक बाद ,मेरे हिसाब से हाथी वाली कविता कुछ और विस्तार मांगती है।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------