उमेश कुमार यादव की कविता - देख तमाशा रोटी का...

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

देख तमाशा रोटी का !

देख तमाशा रोटी का........

रोटी खातिर सब हैं आये

MD आये DM आये

GM और AM भी आये

 

काम के खातिर हम भी आये

कुछ आये जीने के लिये

तो कुछ आये जाने के लिये

कुछ आये पीने के लिये

तो कुछ आये पाने के लिये

 

पर कोई अबतक न आया

जो कुछ करे श्रमिकों के लिये

श्रमदान के बलपर ही तो

अपना उल्लू सीधा करते

रूस, जापान की सैर हैं करते

संचित धन को हल्का करते

चुपके – चुपके पॉकेट भरते

 

बातें करते राष्ट्रहित की

पर काम तो करते अपने हित की

यदि किसी ने मुँह खोली तो

उस बंदे की खैर नहीं है

उसके जैसा कोई बैर नहीं है

रोटी बिना कोई सैर नहीं है

 

रोटी गई तो और नहीं है

छोड़ सोचना इधर उधर का

सोच तु बस अपने तन का

और फिर देख तमाशा रोटी का !

- ---------------------- -

उमेश कुमार यादव / Umesh Kumar yadav

मकान सं.- 25/2 / Qrt No. C-25/2

नोट मुद्रण नगर / Note Mudran Nagar

शालबनी, पोस्ट ऑफिस –आर.बी.एन.एम.एल.

Salboni, Post Office - RBNML

जिला/ Dist. – पश्चिम मेदिनीपुर / West Midnapore

पिन / PIN - 721132 (पश्चिम बंगाल/ W.B.)

ईमेल / Email – nirumbihaka@rediffmail.com,Ukyadav4u@gmail.com

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "उमेश कुमार यादव की कविता - देख तमाशा रोटी का..."

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.