सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी” की कविता : कचोट

कचोट कचोट एक मन उठी, कसक एक मन उठी | क्यों लुट गया वो देश पर, क्यों लुट गया था वो देश पर, अनाम शहीद, बेफिकर, बेजिकर |   जबकि एक ये, क्यों ...

मंजरी शुक्ल की कविता - जब तू याद आया

जब तू याद आया कही सावन आया मिली नज़रे तुझसे तो गुलाल उड़ आया I   सतरंगी इन्द्रधनुष छाया मन को यूँ भरमाया रूई से बादलों में जब तू नज़र आया I   ...

रविवार, 27 फ़रवरी 2011

शशांक मिश्र ''भारती'' की बालकथा - नानी की कहानी

        बच्चों, परम पुण्य दायिनी गंगा के नाम से तुम अपरिचित न होगे। नाचती- गाती, उछलती-कूदती गंगा के मंदाकिनी , सुरसरि , विश्णुपदी , देवापग...

एस के पाण्डेय का व्यंग्य - योग्यता की अवहेलना

माथुर जी का कहना है कि देश में योग्यता की अवहेलना हो रही है। योग्य लोग भरे पड़े हैं। उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। वहीं दूसरी ओर लोग अयोग्यो...

सत्यवान वर्मा सौरभ के दोहे

दोहे - 1- तू भी पाएगा कभी फूलों की सौगात। धुन अपनी मत छोड़ना सुधरेंगे हालात।   2- बने विजेता वो सदा ऐसा मुझे यकीन। आँखों आकाश हो पांवों तले...

विजय वर्मा की रचनाएँ

कहानी लौट आओ दीदी बात उन दिनों की है जब आम आदमी तक टीवी-कंप्यूटर की पहुँच तो नहीं ही हुई थी,रेडियो-ट्रांजिस्टर भी अपनी पहुँच सर्व-सुलभ नह...

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मालिनी गौतम की कविता - स्वर्ण मृग

स्वर्ण मृग बहुत हुआ ! बस ! अब और नहीं ! नहीं बनना है उसे नींव का पत्थर उसे तो बनना है शिखर पर विराजमान स्वर्णिम कलश ! सदियों से देवी बनक...

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

महेन्‍द्र भीष्‍म का आलेख : गीतकार इंदीवर

गीतकार इंदीवर सिनेजगत के उन नामचीन गीतकारों में से एक थे जिनके लिखे सदाबहार गीत आज भी उसी शिद्‌दत व एहसास के साथ सुने व गाए जाते हैं, जैसे ...

आर.वी.सिंह का व्यंग्य - शहर में भैंस

व्यंग्य शहर में भैंस डॉ.आर.वी.सिंह भैंस और शहर का रिश्ता बहुत पुराना है। इधर पश्चिमी तर्ज़ के पब्लिक स्कूलों में पढ़े-लिखे नौकरशाहों को यह ...

गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' की कविताएँ व ग़ज़लें

महाप्राण निराला की जयन्ती पर  विशेष जहाँ किसी को पीड़ित देखा हाथो-हाथ लिया दीन,दुखी,बुढ़िया, भिखमंगा सबका साथ किया   'प्रभापूर्य, शीतल...

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

त्रिवेणी तुरकर की कविता : गुरूदेव को नमन

गुरुदेव को नमन हे श्रद्धेय गुरुदेव ए स्‍वीकारो हम सब का शत शत नमन। हे भारत गौरव देशाभिमानी रचा आपने भारत का राष्ट्रगान। हर भारतवासी को ह...

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

प्रमोद भार्गव का आलेख : अंग्रेजी वर्चस्‍व के चलते संकट में आईं भाषाएं

  यह एक दुखद समाचार है कि अंग्रेजी वर्चस्‍व के चलते भारत समेत दुनिया की अनेक मातृभाषाएं अस्‍तित्‍व के संकट से जूझ रही हैं। भारत की स्‍थिति ...

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : बाजारवाद का घोड़ा

हे विकासशील देश के पिछड़े नागरिकों ! सामान खरीदो और खाओ। खाओ पिओ और ऐश करो बाजारवाद का घोड़ा अश्‍वमेघ यज्ञ की तरह दौड़ रहा है। घोड़े की सवा...

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : रेल-चिन्तन

रेल बजट आने वाला है अतः आज मैं भारतीय रेलों पर चिन्‍तन करुंगा। जैसा कि आप जानते हैं, चिन्‍तन हमारी राष्ट्रीय बीमारी है। जो कुछ नहीं कर सकता...

नन्दलाल भारती की कविताएँ व लघुकथाएँ

॥ नर के भेष में नारायण ॥ बात पर यकीन नही होता आज आदमी की नींव डगमगाने लगती है घात को देखकर आदमी के । बातों में भले मिश्री घुली लगे त...

संजय दानी की ग़ज़ल - समन्दर से मुझको मुहब्बत है दानी, किनारों का तुम रास्ता पूछ लेना।

सितारों से मेरी ख़ता पूछ लेना, अंधेरों  से मेरा पता पूछ लेना। तेरे हुस्न को देखकर, मेरे हमदम, ख़ुदाओं का सर क्यूं  झुका पूछ लेना। मैं तेरे ...

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

दामोदर लाल जांगिड़ की ग़ज़लें

ग़ज़ल 1   खरपतवारें पाली बाबा। अज़ब अनाड़ी माली बाबा॥   टिड्डे बैठे पात पात पर , उल्‍लू डाली डाली बाबा।   कुटिल बिल्‍लियां यहां दूध क...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बाल गीत - यादों की नौका में बचपन

हा हा ही ही से स्वागत यादों की नौका में बचपन जब भी कभी सवार हुआ , भूली बिसरी सब यादों ने आँखों में आकार लिया |   नदी नहाने जाते थे सब मि...

रविवार, 20 फ़रवरी 2011

प्रमोद भार्गव की पुस्तक समीक्षा : रामचरितमानस में पत्रकारिता

समीक्षा रामचरितमानस में पत्रकारिता प्रमोद भार्गव समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा है, तुलसी के रामचरितमानस में जितने गोते लगाओ उतन...

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

हरि भटनागर का कहानी संग्रह : सेवड़ी रोटियाँ और जले आलू

वरिष्ठ और चर्चित कथाकार हरि भटनागर का कहानी संग्रह - सेवड़ी रोटियाँ और जले आलू यहीं पर पढ़िए ई-बुक रूप में या पीडीएफ़ ई-बुक के रूप में डाउन...

प्रमोद भार्गव का आलेख : विश्‍वग्राम में बढ़ता नस्‍लभेद

पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की वकालत करने वाले व उसकी शर्तें विकासशील देशों पर थोपने की तानाशाही बरतने वाले अमेरिका की सरजमीं पर नस्‍लवाद...

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य : मैंने भी खरीदा वाहन

§ आम शहरी नागरिक की तरह मेरे पास भी एक अदद द्विचक्रवाहिनी नामक वाहन था, जिसे मैं अपने विद्यार्थी काल से ही काम में ले रहा था। इस ऐतिहासिक...

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