गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

शेर सिंह की बाल कविताएँ

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वीर शिवाजी

 

भारत मां की शान, पहचान हैं

गुलामी की जंजीरों को

नहीं कर सके थे सहन

ऐसे वीर शिवाजी मराठा महान ।

मां जीजाबाई के सदगुणों, संस्‍कारों

गुरू समर्थ रामदास की शिक्षाओं से

जीवन में सीखा स्‍वतंत्रता, निडरता

ऐसे निराले वीर शिवाजी महान ।

अन्‍याय नहीं सहना, था जीवन का प्रण

नाकों चने चबाए दुश्‍मनों के

अस्‍त्र - शस्‍त्र में नहीं था, उन का कोई सानी

ऐसे विरले वीर शिवाजी महान ।

अपनी बुद्धि, युद्ध कौशल से

दुश्‍मनों को किया हैरान, परेशान

मां का आशीर्वाद था सदा साथ

ऐसे तीव्र बुद्धि थे वीर शिवाजी महान ।

सिखाया उन्‍होंने आजादी का मोल

न झुके न टूटे मिसाल वे अनमोल

जीवन में जो चाहा किया वो हासिल

ऐसे अनूठे प्रेरक वीर शिवाजी महान ।

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हाथी मेरा नाम

 

भारी जिस्‍म स्‍तम्‍भ जैसे पांव

छोटी- छोटी मेरी आंखें

बड़े- बड़े मेरे कान

हाथी मेरा नाम ।

लंबी मेरी सूंड है

छोटी मेरी पूंछ

सूंड से करता सब काम

चाहे खास हो आम ।

जंगल मेरा घर- द्वार

विचरता हूं साथियों के संग

नहीं डरता किसी से भी

चाहे आ जाए बाघ भी ।

सूंड से पानी पीता हूं

सूंड से ही घास- पत्‍ते चुनता हूं

बाहर को निकले दो दांत

यहीं मेरी खास बात ।

गजराज भी कहलाता हूं

मस्‍तानी चाल चलता हूं

श्रेष्‍ठ हूं, पूजित हूं

श्री गणेश जी का स्‍वरूप हूं ।

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चिड़िया रानी

दूर- दूर से आती हूं

भोर में उठ जाती हूं

लम्‍बी दूरी तय करती हूं

मैं चिड़िया रानी हूं ।

आसमान, धरती को नापती हूं

पग- पग बाधाओं को हटाती हूं

ऊंची उड़ाने भरती हूं

मैं चिड़िया रानी हूं ।

फूलों से विशेष लगाव रखती हूं

लेकिन कांटों से भी परहेज नहीं

फुदक- फुदक कर गाती हूं

मैं चिड़िया रानी हूं ।

दाना- दाना चुगती हूं

फूलों के पराग कण भी चुनती हूं

भाता मुझ को चहकना, नाचना

मैं चिड़िया रानी हूं ।

तिनका- तिनका जोड़ती हूं

अपना घर बनाती हूं

मेहनत, लगन मेरी पूंजी हैं

मैं चिड़िया रानी हूं ।

नहीं सीखा आलस करना

अपने बच्‍चों को भी खुश रहना

मेहनत करना सिखाती हूं

मैं चिड़िया रानी हूं ।

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शेर सिंह

सिंडिकेट बैंक , क्षेत्रीय कार्यालय

रामदासपेठ, नागपुर - 440 010.

shersingh52@gmail.com

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