सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

वेलेंटाइन डे विशेष : एस. के. पाण्डेय की हास्य - व्यंग्य कविता . . कुत्ते का प्यार

कुत्ते का प्यार

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     (१)

फैशन करके चली बिलार ।

लग गये पीछे कुत्ते चार ।।

कहते सब, हम तेरे यार ।

हमको हो गया तुमसे प्यार ।।

            (२)

लगती हो कितना सुंदर ।

जो भी देखे जाये मर ।।

आओ झूमें क्या है डर ।

भूलो बिल्ली अपना घर ।।

         (३)

गाँव और भी कई शहर ।

सभी जगह है मेरा घर ।।

तुमको करना नहीं फिकर ।

चलो चलूँ मैं वहीं जिधर ।।

         (४)

प्यार, मार का मुझको ज्ञान ।

फिल्म देखकर बने सुजान ।।

हर करतब की है पहचान ।

दे सकते हैं अपनी जान ।।

              (५)

मान लिया बिल्ली ने बात ।

कुत्ता तो मन में मुस्कात ।।

कुछ दिन बीते बिल्ली लाश ।

मिली आ रही जिसमें बास ।।

            (६)

कुत्तों पे करके विश्वास ।

बिल्ली का हुआ सत्यानाश ।।

जँह-तँह कुत्ते रहें पचास ।

बिल्ली के हित बड़े पिचास ।।

करके इनसे प्यार की आस ।

कितनों का हो चुका विनाश ।।

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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