मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : रेल-चिन्तन

रेल बजट आने वाला है अतः आज मैं भारतीय रेलों पर चिन्‍तन करुंगा। जैसा कि आप जानते हैं, चिन्‍तन हमारी राष्ट्रीय बीमारी है। जो कुछ नहीं कर सकता, वह बैठे-ठाले चिन्‍तन करता है। मैं भी आज अरबों रुपयों की लागत के इस विशाल धन्‍धे याने कि भारतीय रेलों पर चिन्‍तन करुंगा। रेल भवन में इन्‍जिन नहीं है, वह पटरी से उतर चुका है, लेकिन भारतीय रेलें हैं कि धकाधक चल रही हैं।

इधर हमारे रेल-विभाग ने कई बड़ी रेलगाड़ियाँ चलाई हैं, और इन गाडि़यों से भी तेज गति से भ्रष्टाचार की रेल चलाई है। रिजर्वेशन के नाम पर खुली लूट, भारतीय रेल-विभाग का एक अत्‍यन्‍त गौरवशाली कीर्तिमान है। जापान में यदि कोई रेल गाड़ी कुछ क्षण भी देर से पहुंचती है तो मुसाफिरों को पूरा पैसा वापस दिया जाता है, लेकिन हमारा रेल-विभाग इतना चुस्‍त-दुरुस्‍त है कि यहां आज तक कोई गाड़ी समय पर नहीं पहुंची।

इधर भारतीय रेलों का एक नया सुखद पक्ष उजागर हुआ है। यदि आप गरीब हैं तो रेलयात्रा करिए, आपको आत्‍महत्‍या की जरुरत नहीं रहेगी किसी न किसी दुर्घटना में आप तो शहीद हो जायेंगे और आपके घर वालों को दो-लाख रुपयों की आमदनी हो जायेगी। इसे कहते हैं रिन्‍द के रिन्‍द रहे, हाथ से जन्‍नत न गयी। इधर रेल सेवा का एक और पक्ष है, आप रेल गाड़ी की छत पर, ठण्‍डी हवा का आनन्‍द उठाते हुए भी यात्रा कर सकते हैं। अगर कभी कभार बिजली के तार के छू जाने से आप मर जाएं तो आपके घर वालों को भी कुछ मिल जायेगा।

वैसे भारतीय रेलें बड़ी नखरीली और नाजुक मिजाज होती हैं आंधी तूफान के हल्‍के थपेड़े से ही नदी-नालों आदि में गिर पड़ती हैं। वास्‍तव में बेचारी रेल का कोई कसूर नहीं, यह उमर ही ऐसी होती है।

हां, हमारे रेल मंत्री के इस बयान पर ध्‍यान दीजिए कि माल गाड़ियाँ चलाने में ज्‍यादा लाभ है। अरे भाई, जो सवारी गाड़ियाँ आप चला रहे हैं, वे किसी मालगाड़ी से कम है ? हर गाड़ी में क्षमता से दो चार गुनी ज्‍यादा सवारियां चढ़ती है। बहुत सारे भारतीय नागरिक बिना टिकट यात्रा करना अपना धर्म समझते है। रेलों में भिखारी, साधु सन्‍त सन्‍यासी, किन्‍नर भी निशुल्‍क यात्रा करते है। अब रेलों में भोजन पानी का लेन देन बन्‍द हो गया है और इसी कारण सामाजिक समरसता भी समाप्‍त हो गयी है।

तो हे जम्‍बू द्वीप के नागरिकों! उठो और रेल रुपी प्रेयसी का आलिंगन कर स्‍वर्गधाम की सैर करो। शुभास्‍ते येन पन्‍थानः सन्‍तु।

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-यशवन्‍त कोठारी,

86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर,

जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

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