रविवार, 13 फ़रवरी 2011

संजय दानी की ग़ज़ल - तेरे होठों पे जब भी तबस्सुम दिखे, मेरे दिल में ग़ुनाहों का मौसम बने.

तेरे होठों पे जब भी तबस्सुम दिखे,
मेरे दिल में ग़ुनाहों का मौसम बने।


  गेसुयें तेरी लहराती है इस तरह,
गोया बारिश के लश्कर का परचम तने।


  तेरी तस्वीर को जब भी शैदा करूं,
तो मेरी आंखों से सुर्ख शबनम बहे।


दूर हूं तुझसे पर ख्वाहिशे दिल यही,
दिल में तू ही रहे या तेरा ग़म रहे।


तेरे चश्मे समन्दर का है यूं नशा,
इस शराबी के पतवारों में दम दिखे।


चांदनी बेवफ़ाई न कर और कुछ,
चांद का कारवां फ़िर न गुमसुम चले।


मैं चराग़ों की ले लूं ज़मानत सनम,
गर हवायें तेरी सर पे हरदम बहे।


मेरी दरवेशी पे कुछ तो तू खा रहम,
खिड़कियों में ही अब अक्शे-पूनम सजे।


ईद दीवाली  मिल के  मनाया करें,
हश्र तक दानी मजबूत संगम रहे।

---

4 blogger-facebook:

  1. पहले शे’र से ही आनन्द आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (14-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. दूर हूं तुझसे पर ख्वाहिशे दिल यही,
    दिल में तू ही रहे या तेरा ग़म रहे।

    बहुत सुन्दर गज़ल..हरेक शेर दिल को छू जाता है ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. दानी जी आपका ग़ज़ल-दान बहुत रास आया। ध्न्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------