अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी” की कविता : कचोट

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कचोट

कचोट एक मन उठी,

कसक एक मन उठी |

क्यों लुट गया वो देश पर,

क्यों लुट गया था वो देश पर,

अनाम शहीद, बेफिकर, बेजिकर |

 

जबकि एक ये,

क्यों लूटता गया देश को,

कैसे लूट सका देश को |

नामी, नामचीन,

सांप एक आस्तीन,

थी सबको खबर,

था जिकरों में जिकर,

मगर सभी बेपरवाह- बेखबर,

मूढ़ बने आँख मूंदकर |

 

सो

कचोट एक मन उठी,

कसक एक मन उठी |

क्यों मूक मैं, क्यों मूक वो,

हे! अंतर मन मुझे झिंझोड़ दो |

 

देश मेरा, मैं देश को,

मन अंतर अहसास दो |

आत्म दो, विश्वास दो,

ये मन अंतर साहस दो |

पूछ संकू आंखों में आँखे डालकर,

जबाब दो, जबाब दो ||

 

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी”

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atulkumarmishra007@gmail.com

http://atulkumarmishra-atuldrashti.blogspot.com/

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4 टिप्पणियाँ "अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी” की कविता : कचोट"

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