सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी” की कविता : कचोट

clip_image002

कचोट

कचोट एक मन उठी,

कसक एक मन उठी |

क्यों लुट गया वो देश पर,

क्यों लुट गया था वो देश पर,

अनाम शहीद, बेफिकर, बेजिकर |

 

जबकि एक ये,

क्यों लूटता गया देश को,

कैसे लूट सका देश को |

नामी, नामचीन,

सांप एक आस्तीन,

थी सबको खबर,

था जिकरों में जिकर,

मगर सभी बेपरवाह- बेखबर,

मूढ़ बने आँख मूंदकर |

 

सो

कचोट एक मन उठी,

कसक एक मन उठी |

क्यों मूक मैं, क्यों मूक वो,

हे! अंतर मन मुझे झिंझोड़ दो |

 

देश मेरा, मैं देश को,

मन अंतर अहसास दो |

आत्म दो, विश्वास दो,

ये मन अंतर साहस दो |

पूछ संकू आंखों में आँखे डालकर,

जबाब दो, जबाब दो ||

 

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी”

clip_image004

atulkumarmishra007@gmail.com

http://atulkumarmishra-atuldrashti.blogspot.com/

4 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------