गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

त्रिवेणी तुरकर की कविता : गुरूदेव को नमन

गुरुदेव को नमन

image

हे श्रद्धेय गुरुदेव ए स्‍वीकारो हम सब का शत शत नमन।

हे भारत गौरव देशाभिमानी रचा आपने भारत का राष्ट्रगान।

हर भारतवासी को है जिस पर अति अभिमान।

भारत भू के इस यशोगान का करते सब सम्‍मान।

हुई दूर तिमिर छाया पसरा उज्‍जवल आलोकित ज्ञान।

देश देशांतर तक हुआ विस्‍तारित आपका गान।

मिला आपसे ही विश्‍व को गीतांजली सा दिव्‍य उपहार।

मां भारती हुई अति पुलकित सपूत आप सा पाकर।

जननी को देखा आपने माता में जन्‍म भूमि में

ए उससे भी व्‍यापक बनकर देखा समग्र विश्‍व में।

दे गये आप हमें जो साहित्‍य संपदा अनमोल।

कभी न होंगे विस्‍मृत वे शब्‍दरत्‍न अनमोल।

किया बंधन-मुक्‍त शिक्षा को आपने विद्यालय की चारदीवारी से।

शांतिनिकेतन से पाई हमने नई परिभाषा विद्यालय की आपसे।

मन पर अंकित है छवि अब भी

ए चुलबुली मिनी व बातूनी काबुलीवाले की।

दिल को छू लेने वाली छाप उन नन्‍हीं अंगुलियों की।

जिसे देखकर करता काबुली याद अपनी बिटिया की।

मिनी में काबुली देखता छवि अपनी प्‍यारी सी बेटी की।

शांतिनिकेतन की रचना कर किया अपना स्‍वपन साकार।

हुई अनेक प्रतिभायें विकसित प्रेरणा आपसे पाकर।

मिले देश को जिससे विविध प्रतिभा-संपन्‍न व्‍यक्‍तित्‍व।

निखर निखर कर फैले जग भर ये प्रखर व्‍यक्‍तित्‍व।

इच्‍छा प्रबल है देख पाउं मैं उन स्‍थानों को जी भर।

अनुभूति पाउं वहां व्‍याप्‍त आपके अस्‍तित्‍व की जी भरकर।

गर्व करेगा सदा भारत देश हे गुरुदेव आप पर।

नोबल पुरस्‍कार सम्‍मानित हुआ आप-सा विजेता पाकर।

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------