शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मालिनी गौतम की कविता - स्वर्ण मृग

Malini gautam new (Custom)

स्वर्ण मृग


बहुत हुआ ! बस !

अब और नहीं !

नहीं बनना है उसे

नींव का पत्थर

उसे तो बनना है

शिखर पर विराजमान

स्वर्णिम कलश !

सदियों से देवी बनकर

नींव में डालती रही

त्याग, समर्पण

प्रेम,आदर्श

और तप के पत्थर !

हर बार उसे ही

छला

जाता रहा

कुंती, गांधारी,

अनुसूया और सावित्री

के नाम पर !

और हर बार

स्वर्ण कलश बन

शिखर पर

जगमगाता रहा

कोई और !

हर बार एक सीता

अपना सर्वस्व

समर्पित कर

अनुकरण करती रही

अपने ही राम का

और हर बार

ली गई उसी सीता की

अग्नि परीक्षा !

पर कर लिया है

उसने अब संकल्प

कि नहीं चलेगी वह

किसी राम के

बताये हुए पथ पर

उसे तो चलना है

अपने ही

बनाये हुए रास्ते पर !

नहीं देगी वह अवसर

किसी को

लक्ष्मण रेखा खींचने का

क्योंकि कर लिया है

उसने निश्चित

कि वह स्वयं

ही मारेगी

अपने हिस्से के

स्वर्ण मृग को !

डॉ. मालिनी गौतम

7 blogger-facebook:

  1. सुंदर सार्थक सन्देश देती बेहतरीन रचना के लिए बधाई......

    उत्तर देंहटाएं
  2. उसने निश्चित

    कि वह स्वयं

    ही मारेगी

    अपने हिस्से के

    स्वर्ण मृग को !

    main bhi saath hun

    उत्तर देंहटाएं
  3. આદરનીયા ડાક્ટર સાહિબા ! બળે હી સંવેદનશીલ વિષય પર કલમ ચલાયી હૈ આપને ........અપની લક્ષમણ રેખા ખુદ હી તય કરને પર સહમત હૂં .........સ્વર્ણ કલશ બનને કે સંકલ્પ સે ભી સહમત હૂં ........પર કિસી રામ સે બગાવત નહીં કી જા સકતી ..........સામંજસ્ય હોના ચાહિયે સ્ત્રી ઔર પુરુષ કે બીચ .........કિસી ભી એક પક્ષ કા અતિવાદ કી ઓર જાના ......ઉચિત નહીં હોગા . સ્વ કે અસ્તિત્વ કો સુસ્થાપિત કરને કા યહ તેવર અચ્છા લગા ........સ્વાગત હૈ જી !.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन प्रस्तुति ,शायद एक औरत ही इतनी सिद्दत से एक
    औरत का दर्द महसूस कर सकती है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. ओम कश्यप जी,रश्मि जी,काजल जी,कौशलेन्द्र जी,विजय जी आप सभी को धन्यवाद अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत कराने के लिये। कौशलेन्द्र जी मैं आपकी बात से बिल्कुल सहमत हूँ कि स्त्री-पुरूष के बीच सामंजस्य होना ही चाहिये.......उद्देश्य किसी भी राम से बगावत करने का बिल्कुल नहीं है.........पर एतराज उन रास्तों पर चलनें से है जिनमें अंत में अग्नि-परीक्षा ही देनी पड़ती है.........!

    उत्तर देंहटाएं
  6. dकविता का विषय बड़ा सार्थक है। वास्‍तव में यदि नारी यह संकल्‍प ले ले कि उसे अपने हिस्‍से का स्‍वर्ण मृग स्‍वयं ही मारना है, तो उसे उसका वास्‍तविक सम्‍मान मिल सकता है।

    उत्तर देंहटाएं

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