मंजरी शुक्ल की कविता - जब तू याद आया

जब तू याद आया

कही सावन आया

मिली नज़रे तुझसे तो

गुलाल उड़ आया I

 

सतरंगी इन्द्रधनुष छाया

मन को यूँ भरमाया

रूई से बादलों में

जब तू नज़र आया I 

 

कलाई खनक उठी

मेहँदी इतराने लगी

बिंदिया जगमक चमकी

तब तू मुस्काया I

 

धानी चुनर उड़ चली

सांझ आँचल ओढ़ ली

चाँद थोड़ा शरमाया

मीत था मेरा आया

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डॉ. मंजरी शुक्ल
श्री समीर शुक्ल
सेल्स ऑफिसर (एल.पी.जी.)
इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन
गोरखपुर ट्रेडिंग कंपनी
गोलघर
गोरखपुर (उ.प्र.)
पिन - २७३००१

5 टिप्पणियाँ "मंजरी शुक्ल की कविता - जब तू याद आया"

  1. कल्पना की अच्छी उड़ान .....लेखन जारी रखें ....मेरी शुभकामनाएं .

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  2. धानी चुनरी उड़ चली ,
    सांझ आम्चल ओढ ली।

    सुन्दर और मासूम अभिव्यक्ति, बधाई।

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  3. सरल और स्पष्ट रचना

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