सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

वेलेन्टाइन डे विशेष : बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष का व्यंग्य - वेलेंटाइन डे पर प्यार की पढ़ाई

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मोतीझील की सूखी झील के ठूठे पेड़ों और झुरमुटों के इर्द-गिर्द, दिलों के मंदिर में बदलते विद्यामंदिरों में अपने भविष्य को चमकाने की जगह, अपने वर्तमान में ही मग्न या मंदिर में राधा-श्याम को पूजने के बहाने अपने-अपने राधा-श्याम संग कुछ लो दो होते हुए भी एक लग रहे हैं। लगता है जैसे हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट, लैला-मजनूं.....आदि वेलेंटाइन डे के बहाने इस धरती को पुनः प्रेम मय करने आ गए हैं। कभी विद्यालय का मुंह न देखने वाले भी आज फिल्मी नायक-नायिकाओं की भांति कटे-छटे, छोटे-छोटे,रंग-बिरंगे परिधानों में सज-संवरकर इस चौदह फरवरी के महाकुम्भ के प्रेम पावन पर्व पर शाही अन्दाज में इन संगम तटों पर महामिलन हेतु पधार रहे हैं।

चहुं ओर इत्र और गुलाब के गुलाबी फूलों की महक, इधर-उधर होते कीमती तोहफों की खनक, महामिलन के यात्रियों से भरी बिना रोशनी की ऊबड़-खाबड़ गड्ढों वाली सड़क, कुछ दिलों के कनेक्ट ना हो पाने की कसक और कुछ लोगों के इस मुहब्बत रूपी कबाब में हड्डी बनने की ठसक से सारा वातावरण गुलाबी-गुलाबी और लाल-पीला हो रहा है।

उधर हमारे पढ़ाकू प्रोफेसर शेखू, जो थ्योरी पढ़ाने हेतु छात्रों को खोज रहे हैं। मगर छात्र है कि सन्त श्री श्रीवेलन्टाइन के विशेष सेमिनार में प्रो. मटोक थान के संग ढाई अक्षरों का मटक-मटक कर पूर्ण प्रेक्टिकल ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं और कुछ चांद और फिजा की जिन्दगी के नाटकीय पात्रों की तरह एक दूसरे के साथ इश्क के खट्टे-मीठे स्वाद चख रहे हैं।

महापर्व वेलेन्टाइन डे सप्ताह भर मनाया जाने वाला प्यार, मोहब्बत और इश्क का अनूठा त्यौहार होता है। सर्व प्रथम सात फरवरी को रोज डे मनाया जाता है; मतलब इस दिन दिल की फुलवारी मे प्यार के फूल खिलते है। फिर आठ फरवरी को प्रपोज डे होता है, ये दिन उस खिले हुए फूल के कबूलनामे वाला दिन होता है।

नौ फरवरी को चाकलेट डे होता है; इस कबूलनामे की खुशी में देशी लडडू की जगह विदेशी चाकलेट खाकर मुंह मीठा किया जाता है। दस फरवरी टेडी डे के रूप में मनाया जाता है इस दिन जोड़े एक दूजे को टेडी के रूप में अपनी प्रेम सम्वेदनायें भेट करते हैं। ग्यारह फरवरी प्रामिस डे के रूप में मनाने का प्रावधान है, किन्तु ये प्रामिस, कस्में-वादे सिर्फ कहने के लिये होते हैं निभाने के लिये नहीं।

बारह फरवरी किस डे के रूप में जगप्रसिद्ध है। इस डे पर क्या होता है ये सबको पता रहता है; ना पता हो तो इमरान हाशमी की फिल्म किस दिन काम आयेगी। तेरह फरवरी को हग डे आता है इस दिन गले लगकर आनन्दित होने का प्रावधान है। तब कही जाकर अन्त में इतने सारे कस्मे वादे निभाने और प्यार वफा के गीत गाने के बाद, इतने इन्तजार और तड़प के बाद, महाचाहत वाला चौदह फरवरी का महापर्व वेलेन्टाइन डे आता है। यह त्यौहार भी बहुतों को हंसाता है, बहुतों को रुलाता है। क्योंकि इस त्यौहार का आनन्द भी इश्क कला के होनहार विद्यार्थी ही उठा पाते है बाकी तो सल्लू मियां की तरह इधर उधर ही डोला करते हैं।

एक हमारे प्रो. शेखू है जो सफेद बाल व तमाम डिग्रियां समेटे हुए भी इस मूल तत्व इश्क ज्ञान से अपरिचित हैं। वो सोचते हैं ; क्या भारतीय समाज में इस तरह के पर्व उचित है ? क्या विद्यालयों का इश्कालयों में बदलना उचित है? *

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बृजेन्द्र श्रीवास्तव "उत्कर्ष"
206, टाइप-2,
आई.आई.टी.,कानपुर-208016, भारत
Brajendra  Srivastava “Utkarsh”
206, Type-2
IIT Kanpur-208016, INDIA

2 blogger-facebook:

  1. बढ़िया लिखा है जनाब

    उत्तर देंहटाएं
  2. बात समझ की होती है अगर समझ ही हो तो व्यंग्य क्यों? और अगर समझ न हो तो भी व्यंग्य क्यों? फिर भी आपका प्रयास समझादारी भरा है। अच्छा बन पड़ा। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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