रविवार, 27 फ़रवरी 2011

शशांक मिश्र ''भारती'' की बालकथा - नानी की कहानी

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बच्चों, परम पुण्य दायिनी गंगा के नाम से तुम अपरिचित न होगे। नाचती- गाती, उछलती-कूदती गंगा के मंदाकिनी , सुरसरि , विश्णुपदी , देवापगा , हरिनदी , भागीरथी आदि अनेक नामों की तरह एक नाम जाह्मवी भी है।

        हां नानी, है तो, जरा समझाकर बताओ ना हम भी तो जानें।

        तो सुनो , बच्चों- दिलीप के पुत्र भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा जी ने पृथ्वी पर आना स्वीकार कर लिया। जिस ओर भगीरथ   जाते । उसी ओर समस्त पापों का नाश करने वाली नदियों में श्रेष्ठ यशस्वी गंगा भी जाती।

        उसी समय मार्ग में अद्भुत पराक्रमी राजा जह्नु यज्ञ कर रहे थे। गंगा जी अपने जल प्रवाह से उनके यज्ञ मण्डप को बहा ले गई। रघुनन्दन राजा जह्नु इसे गंगा जी का गर्व समझकर क्रोधित हो उठे।

        फिर क्या हुआ नानी? बच्चों ने बीच में ही प्रन करते हुए पूछा,

        आगे ध्यान से सुनो- '' फिर तो उन्होंने गंगाजी के उस समस्त जल को ही पी लिया। यह संसार के लिए बड़े आश्चर्य की बात हुई। तब देवता ,गन्धर्व तथा ऋषि अत्यन्त आश्चर्य चकित होकर पुरुष प्रवर महात्मा जह्नु की स्तुति करने लगे। 

        उन्होंने गंगाजी को उन नरेश की कन्या बना दिया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि -'' गंगा जी को प्रकट करके आप ही इनके पिता कहलाएंगे।''

        फिर क्या था , इससे सामर्थ्यशाली महातेजस्वी राजा जह्नु प्रसन्न हो गए और उन्होंने अपने कानों के छिद्रों के द्वारा गंगा जी को पुनः प्रकट कर दिया। 
                     
        इसीलिए गंगा जह्नु की पुत्री तथा जाह्मवी कहलाती है। कहानी समाप्त करते हुए नानी ने कहा।
 

सम्पर्कः-

दुबौला-रामेवर-262529

पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड,

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