गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी” की कविता - विजेता मिस्र

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मिस्र की ताकत बने

हाथ जो सब साथ थे |

मुठ्ठियाँ सब कस सकीं,

उंगलियां सब साथ थीं ||

 

वजीफा है अब आँखों की रौनक,

रौनकें अब आसान हैं |

देखती निगाहें अब तुम्हें हैं,

बात ये मन में बसा लो |

 

जो ताकत अब तक थी हाथ में,

उसे अब पैरों में समा लो |

बिखरना अब न है यहीं पर,

कदम अब आगे बढ़ा लो |

 

चमक जो है आँखों में पैदा,

उसे सम्मुख अब सजा लो |

कदम – ब –कदम बढ़ना है आगे,

क़दमों को ताकत बना लो |

जीतते हैं जंग कैसे थोड़ा ये हमको भी सिखा दो ||

 

अतुल कुमार मिश्र “राधास्वामी”

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atulkumarmishra007@gmail.com

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1 blogger-facebook:

  1. सोने का दिखावा करने वाले को जगाना सम्भव नहीं होता...

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