सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

वेलेन्टाइन डे विशेष : बृजेन्द्र श्रीवास्तव "उत्कर्ष" की कविताएँ

पहली नजर का पहला प्यार

UTKARSH (Custom)

कोयल कूके डाली-डाली, मधुवन में गुंजार हुआ |
मन के कोरे कागज पर फिर, एक नया श्रृंगार हुआ |


नजरों से जब नजर मिली तो, दिल गुल से गुलजार हुआ |
जबसे हमको पहली नजर का, पहला-पहला प्यार हुआ ||


दीवानों सा स्वप्न संजोएँ, खोया-खोया रहता हूँ |
एक उनकी चाहत में हरदम, भोया-भोया रहता हूँ |


देख चाँद मेरा-मुझको तो, एक नया खुमार हुआ |
जबसे हमको पहली नजर का, पहला-पहला प्यार हुआ ||


पास मेरे जब रहते है वो, दिल खिल-खिल सा जाता है |
साँझ तले कुमुदिनी में कोई, भौंरा मिल सा जाता है |


मिलन और बिछुड़न में दीवाना, ये दिल बेक़रार हुआ |
जबसे हमको पहली नजर का, पहला-पहला प्यार हुआ ||

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प्रेम

दिल किसी का न टूटे दुआ कीजिये,
बनके राधा के मोहन रहा कीजिये /


प्रेम की बांसुरी गर बजाये कोई,
प्रेमधुन में उसी के रमा कीजिये //


प्रेम अनमोल है इसकी कीमत नहीं,
धर्म और धन में इसको तो मत तौलिये /


जिन्दगी चार दिन की जियो प्रेम से,
नफरतों का जहर तो है मत घोलिये //


प्रेम तो है इबादत उस ईश की,
प्रेम रस में हमेशा गमन कीजिये /


तुमको मिल जाये कोई दीवाना कभी,
उसकी दीवानगी को नमन कीजिये //


इस धरा पर है चहुं ओर संकट बहुत,
प्रेम के हर सुमन से चमन कीजिये /


मिलन हो जाये सबका जरुरी नहीं,
दूर ही दूर से प्रेम है कीजिये //

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बृजेन्द्र श्रीवास्तव "उत्कर्ष"
206, टाइप-2,
आई.आई.टी.,कानपुर-208016, भारत
Brajendra  Srivastava “Utkarsh”
206, Type-2
IIT Kanpur-208016, INDIA

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