शनिवार, 5 मार्च 2011

हरीश नारंग की कविता - आधुनिक युग की नारी

       
 

नारी दिवस पर अपनी श्रद्धा, स्नेह व् सम्मान के प्रतीक स्वरुप मेरी यह कविता उस हर नारी को समर्पित है जो हमारे जीवन में माँ, बहन, बेटी, पत्नी व मित्र के रूप में हमारी प्रेरणा स्त्रोत हैं .

आज की नारी को हमारा सलाम .

   
 
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सजग, सचेत, सबल, समर्थ

आधुनिक युग की नारी है

मत मानो अब अबला उसको , सक्षम है बलधारी है

बीत गई वो कल की बेला

जीती थी वो घुट घुट कर

कुछ न कहती , सब कुछ सहती

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पीती आंसू छुप छुप कर

आज बनी युग की निर्माता, हर बाधा उस से हारी है

चारदीवारी का हर बन्धन

तोड़ के बाहर आई है

घर, समाज और देश में उसने

अपनी जगह बनाई है

ऊंचे ऊंचे पद पर बैठी, सम्मान की वो अधिकारी है

मत समझो निर्बल बेबस,

लाचार आज की नारी है ,

नर की प्रबल प्रेरणा का

आधार आज की नारी है ,

स्नेह, प्रेम व ममता का

भन्डार आज की नारी है ,

हर जंग जीते शान से यह, अभियान अभी भी जारी है

--

हरीश नारंग

15, अरावली अपार्टमेंट्स

अलकनंदा, नई दिल्ली

3 blogger-facebook:

  1. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 08-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सार्थक रचना...भावों, शब्दों और लय का अद्भुत संयोजन..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  3. नर की प्रबल प्रेरणा का

    आधार आज की नारी है ,

    स्नेह, प्रेम व ममता का

    भन्डार आज की नारी है ,
    sunder soch badhai

    उत्तर देंहटाएं

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