सोमवार, 7 मार्च 2011

मनोज अग्रवाल की कविता - इंतजार

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इंतजार

कोई

इंतजार नहीं करता,

तारीखों के

ठहर जाने का।

हम चलते चले जाते हैं,

दूर की यात्राओं में।

तेज हवाओं,

तीखी बारिश,

गहन कालिमा के बीच

क्षत-विक्षत

अपनी नौका-पतवार

और

अविजित इच्छा शक्ति

के साथ।

हम प्रयास करते जाते हैं

आगे बढ़ने की।

प्रतीक्षा है,

बसंत की।

एक साफ -सुथरी सुबह की।

जब थम जायेगी-

यह बारिश।

गुजर जायेगा यह तूफान।

---

-मनोज अग्रवाल

मुंगेली, जिला-बिलासपुर

छत्तीसगढ़

2 blogger-facebook:

  1. प्रतीक्षा है,

    बसंत की।

    एक साफ -सुथरी सुबह की।
    jab aaye , per aaye

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऍह्हत विछत अपनी नौका पतवार और, अविजीत ईच्छा शक्ति
    के साथ हम प्रयास करते हैं आगे बढने का ।

    बेहेतेरीन अभिव्यक्ति , बधाई मनोज अग्रवाल जी।

    उत्तर देंहटाएं

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