सोमवार, 7 मार्च 2011

मनोज अग्रवाल की कविता - इंतजार

DSCN4005 (Custom)

इंतजार

कोई

इंतजार नहीं करता,

तारीखों के

ठहर जाने का।

हम चलते चले जाते हैं,

दूर की यात्राओं में।

तेज हवाओं,

तीखी बारिश,

गहन कालिमा के बीच

क्षत-विक्षत

अपनी नौका-पतवार

और

अविजित इच्छा शक्ति

के साथ।

हम प्रयास करते जाते हैं

आगे बढ़ने की।

प्रतीक्षा है,

बसंत की।

एक साफ -सुथरी सुबह की।

जब थम जायेगी-

यह बारिश।

गुजर जायेगा यह तूफान।

---

-मनोज अग्रवाल

मुंगेली, जिला-बिलासपुर

छत्तीसगढ़

2 blogger-facebook:

  1. प्रतीक्षा है,

    बसंत की।

    एक साफ -सुथरी सुबह की।
    jab aaye , per aaye

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऍह्हत विछत अपनी नौका पतवार और, अविजीत ईच्छा शक्ति
    के साथ हम प्रयास करते हैं आगे बढने का ।

    बेहेतेरीन अभिव्यक्ति , बधाई मनोज अग्रवाल जी।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------