गुरुवार, 24 मार्च 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविता - याद आई बीती बातें

  

   बीती बातें

बीते बरस सैकड़ा भर

अभी तक नहीं भूला पर |

बना रेत का घर घूला ,

जो थोपा था पंजों पर |

 

आया शाला से पैदल ,

झड़ी लगी थी झर झर झर |

लथपथ पूरा पानी से ,

काँप रहा था थर थर थर |

 

छींक छींक बेहाल हुआ ,

नाक बोलती घर घर घर |

विक्स मला था मम्मी ने ,

पीठ नाक और सीने पर |

 

याद हमें आती रहती ,

बीती बातें ये अक्सर |

खुशियों से मन भर जाता ,

हो जाते ताजा दम तर |

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