सोमवार, 28 मार्च 2011

अमिता कौंडल की कविताएँ

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१. लगाने को अपना इक वन

सुंदर सा इक मेरा गाँव 
पर्वत के आँचल में 
चारों और से घिरा हुआ था 
हरे भरे वृक्षों से 
मेरे मुन्ने को भाते थे 
वृक्ष और उनपे कूदते बंदर 

छोड़ कर उस गाँव को 
प्रकृति की ठंडी छाँव को 
हम विदेश आ गए 
बडी बडी इमारतों के
समुंदर में  समा गए 


कभी कभी बन मुन्ना बंदर 
मुझे बनाता था वो पेड़ 
झूल कर मेरी बाजू पर
करता था उस वन को याद 
लौट के जब हम  आए गाँव 
गायब था वो पूरा वन 
उद्योगीकरण का दानव 
पूरा उसे चुका था निगल 
और वहां  खड़ा था 
एक  बढा  सा कलघर  
उगले  जो जहरीला धुआँ   
और बंदर  मचा  रहे थे हुड़दंग  
उनका जो  उजड़ा था चमन
मुन्ना होकर  बोला उदास 
कहाँ गया माँ मेरा वन ?


सब बंदरों को क्यूँ भगाते हैं ?
वो क्यों  न  मुझे  हंसाते हैं ?
दादाजी ने तब समझाया 
वनों का उसे महत्व बतलाया
बोला बढे ही जोश में 
माँ, मैं वन  लगाऊंगा 
और बंदरों को बसाउंगा 
चला फिर दादाजी के संग 
लगाने को अपना इक वन 

 

२.कटने  से  भी  बचाने  हैं 

चला मेरा मुन्ना लगाने को
अपना इक वन
चुने सारे मनपसंद पौधे
और बनाया अपना उपवन
सीखा दादा जी से
उनकी देखभाल करना
सुबह शाम देता था पानी
और करता था ढेरों  बातें


जब कोई नया पत्ता आता
हर्षित हो घर में चिल्लाता
यूँ ही बीता इक माह
पर वन बढा  जरा सा
लौट के हमको आना था
परदेशी बन जाना था
उसका पुलकित मन
ले दादाजी से वादे
पानी देना प्रतिदिन इनको
और करना मीठी मीठी बातें
लौट के मैं जब आउंगा
देखूंगा अपना यह वन


प्रतिदिन करता वन को याद
यूँ ही बीता फिर एक साल
लौट के हम  घर आये थे
पौधे  बढे थे थोड़े से
पर वृक्ष  नहीं बन पाए थे
हो कर बोला बढा उदास
माँ कब बनेगा मेरा वन
समझाया उसे तब प्यार से
वृक्ष होते हैं बच्चों जैसे
धीरे धीरे बढ़ते हैं


दादाजी ने रोपे जो वृक्ष
तो फल आपने खाए हैं
बोला होकर उत्सुक
लगते इतने वर्ष
एक वृक्ष को बढ़ने में
फिर एक ही दिन में
कट जाता वो क्यों
माँ अब मैं समझा हूँ
केवल वृक्ष नहीं लगाने हैं
पर कटने से भी बचाने हैं.

--

6 blogger-facebook:

  1. सुन्दर रचनाएँ ....सन्देश देती हुई

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह. सुंदर हैं कविताएं.

    उत्तर देंहटाएं
  3. rachana8:22 pm

    aaj ke smy me yadi insan itna samajh jaye to kya hi baat ho .abhi bhi samy hai sochna to hoga hi .amita ji aaj kal shayad koi is vishya pr likhta nahi .aapne bahut sahi mudda uthaya hai sunder kavita ke liye badhai
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  4. अमिता जी !
    आपकी रचना में
    आपका पर्यावरण प्रेम
    पूरा-पूरा छलका है
    देश हो या विदेश
    यह दुःख तो सबका है.
    मुन्ने से यह भी कहना
    जल भी बचाना है
    वन से जल
    और जल से जीवन संवारना है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. amita kaundal7:57 pm

    संगीता जी, रचना जी व् कौशलेन्द्र जी सराहनीय शब्दों के लिए धन्यवाद. आपको विषय व् कविता दोनों अच्छी लगी इसके लिए हार्दिक धन्यवाद.कौशलेन्द्र जी प्रयतन करूंगी की जल सरंक्षण पर भी कविता लिखूं.
    सादर
    अमिता

    उत्तर देंहटाएं

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